दम्भ नहीं,
अडिग विश्वास है,
पराजित करूँगा।
सिर्फ JNU की चार दीवारें,
ही भारत नहीं,
काश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत आबाद है.
जिंदगी के हर मैदान में,
मिटटी के हर प्रांगण में,
आज नहीं तो कल,
तुम्हे विस्थापित करूँगा.
ये अफवाह नहीं,
आरम्भ है.
यह भूचाल नहीं,
मेरा शंखनाद है.
परमीत सिंह धुरंधर