ओम पूरी


जो हो न सका,
अपनी बीबी का.
वो क्या होगा?
फिर माटी का.
अगर इतना ही,
ओम पूरी होते ज्ञानी।
तो लगाम न छुटता,
यूँ उनकी बाणी का.

 

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a comment