पिता – पुत्र


ज्ञान – विज्ञान सब झूठ है,
सच्चा बस प्रेम है मेरा।
पुत्र तुम्हे पाने को,
मैंने खोया है कितने स्वप्न मेरा।
पुत्र तुम कर्तव्यगामी बनो,
बस यही होगा गर्व मेरा।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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