शहर में जो भी ख्वाब हैं


शहर में जो भी ख्वाब हैं
सब उदास हैं.
घरों में बालकनी है
बालकनी में पौधें हैं
पौधों पे फूल और फूल पे तितलियाँ हैं
पर ना वो सुबह है ना वो शाम है.
शहर में जो भी ख्वाब हैं
सब उदास हैं.

अजीबो-गरीब रिश्ते हैं
झगड़ालू बीबी तो भागती प्रेमिका है
बिना शादी के होते बच्चे हैं
पर किसी को नहीं पता
कैसे किसके माँ – बाप हैं?
शहर में जो भी ख्वाब हैं
सब उदास हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

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