ईसामसीह – रामचंद्र जी संवाद


ईसामसीह जी कह गए रामचंद्र जी से
एक दिन ऐसा कलयुग आएगा
तन्हा – तन्हा सा Crassa
तन्हाई में गायेगा।

रामचंद्र जी कह गए ईसामसीह जी से
एक दिन ऐसा कलयुग आएगा
अकेला ही Crassa
वन में फूल खिलायेगा।

ईसामसीह जी कह गए रामचंद्र जी से
एक दिन ऐसा कलयुग आएगा
हिन्दू – मुस्लिम, सिख – ईसाई
हर लड़की से Crassa चोट खायेगा।

रामचंद्र जी कह गए ईसामसीह जी से
एक दिन ऐसा कलयुग आएगा
हर ब्रह्मास्त्रा को Crassa
अकेला ही काट गिरायेगा।

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


मोहब्बत
एक दास्ताँ बन जाए.
कुछ ऐसे करो
की कोई निशाँ बन जाए.

आज हम हैं तुम्हारी बाहों में
कल हों या ना हों.
इस कदर चुम लो इस एक रात में
की जिंदगी आसान हो जाए.

परमीत सिंह धुरंधर

ईसामसीह बोले रामचंद्र से


29 नवंबर से 16 दिसंबर तक
आते – आते
सत्ता बदल गयी.
ईसामसीह बोले रामचंद्र से
लड़की तो Crassa पे भारी पड़ गयी.

ऐसे पलटी
वादे करके, सपने दिखा के
ये तो हमारी सोच से भी
आगे निकल गयी.
ईसा बोले रामचंद्र से
लड़की तो Crassa पे भारी पड़ गयी.

धीरज से गंभीर
मुस्करा कर
फिर बोले रामचंद्र जी, ईसामसीह से
कब नारी हुई है किसी की?
अतः लड़की Crassa पे भारी पड़ गयी.

परमीत सिंह धुरंधर

सत्ता का दम्भ


सत्ता का दम्भ ही
सत्ता का नाश करता है.
गजराज मद में हो
तो महावत पे प्रहार करता है.
प्रेम अगर सच्चा हो तो
हुस्न किसी और के लिए
श्रृंगार करता है.

परमीत सिंह धुरंधर

साधू और शिव


साधू बनकर भी मैं
त्याग नहीं कर पाया मोह को.
घर त्यागा, माँ को त्यागा
त्याग नहीं पाया बंधन को.

दो नयना अब भी हर लेते हैं
चैन मेरे मन का.
सर्वस्व का त्याग कर के भी शिव
मैं बाँध ना पाया अपने मन को.

परमीत सिंह धुरंधर

उषा और पंक्षी


पंक्षी कलरव करते हैं
पंक्षी अभिनय करते हैं
ए उषा देख तेरे इंतज़ार में
पक्षी कैसे मौन धारण रखते हैं?

सूरज की प्रथम किरण पर
चहचहा उठते है ये
अचानक दुनिया भर की खुशियाँ
उमंगें प्राप्त कर,
नयी जवानी में नृत्य करते हैं.

और बिना किसी पल देरी के
तेरे स्वागत में,
क्षितिज की ओर,
नीले आसमान में
पंख कोलकर उड़ान भरते हैं.

पंक्षी कलरव करते हैं
पंक्षी अभिनय करते हैं
ए उषा देख तेरे इंतज़ार में
पक्षी कैसे मौन धारण रखते हैं?

परमीत सिंह धुरंधर

शहर में


हमसे क्या पूछते हो पता शहर में?
हमें खुद नहीं पता की है हम किस शहर में.

बस जुबान छोड़ के मेरा
बाकी सब कुछ बदल दिया इस शहर ने.

भटकते रहते हैं जाने किसकी खोज में
ये भी नहीं पता की आये थे कहाँ से इस शहर में?

परमीत सिंह धुरंधर

बिना T-shirt के आज


You are my heart baby
You are my heart
हौले – हौले खेलेंगें बिना T-shirt के आज.

मम्मी को झूठ बोल दे
और बंक कर दे सारी क्लास
पूरा दिन गुजारेंगे आज एक साथ.

You are my heart baby
You are my heart
हौले – हौले खेलेंगें बिना टीशर्ट के आज.

परमीत सिंह धुरंधर

छुट्टियों में स्कूल आने का बहाना दे गए वो


दर्द से भरी है जिंदगी
और कुछ नहीं पर हौसला दे गए वो.

ये शहर ही है ऐसा की हर कोई है अकेला
पर किताबों में छुपाकर पता दे गए वो.

उम्र ही ऐसी, क्या वादा और क्या इरादा?
पर छुट्टियों में स्कूल आने का बहाना दे गए वो.

ये शहर ही है ऐसा की हर कोई है अकेला
पर किताबों में छुपाकर पता दे गए वो.

परमीत सिंह धुरंधर

कब मानव बाँध पाया है सागर दुबारा?


गुजरा हुआ ज़माना हमें बुलाता ही रहा
बढ़ चले जो हम तो मुश्किल था लौटना हमारा।
अडिग रहे तो तट पे तो
सागर को भी छोड़ना पड़ा पथ हमारा।

और जब भी लिखा जाएगा इतिहास
हमेसा श्रीराम ही गलत होंगें इतिहासकारों की नजर में
मगर कब मानव फिर बाँध पाया है सागर दुबारा?

परमीत सिंह धुरंधर