नवयौवना


दिल समझेगा तेरा जिस दिन मुझको
उस रात तू मेरी बाहों में होगी
अरे बन के नवयौवना तू
सेज पे मेरे फिर पिघलेगी।

परमीत सिंह धुरंधर

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