मौक़ा मिले


कुछ आपके करीब से गुजरने का मौक़ा मिले
कुछ आपके पहलु में ठहरने का मौक़ा मिले
कभी निगाहों, कभी बाहों
कभी आपकी जुल्फों से खेलने का कोई मौक़ा मिले
ठहर जाए जिंदगी वो पल बनकर
जिस पल में तुझे अपना कहने का मौक़ा मिले।

परमीत सिंह धुरंधर

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