आप अंत हो अनंत के


आप अंत हो अनंत के
हे शिव, आप हो समस्त के.
ज्ञानियों के ज्ञान में
प्राणियों के प्राण में
हे शिव, आप स्वयं हो
श्री राम के ध्यान में.
आप अंत हो अनंत के
हे शिव, आप हो समस्त के.

जिसने गरल को सौंदर्य दिया
धारन कर कंठ में
और गंगा को बाँध लिया
अपने जटाओं के भंवर में.
हे शिव, आप हो समस्त में
हे शिव, आप हो समस्त के.

Rifle Singh Dhurandhar

Leave a comment