खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार


खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।
पाप का नाश हो, भोले, बढ़े पुण्य अपार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।
खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।

तप रहे तपस्वी, भोले, जल रहा है संसार,
सृष्टि पर, भोले, बढ़ रहा है भार।
झूमकर, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
अब तो सुन लो, भोले, भगीरथ की गुहार।
खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।

हलाहल को बाँधकर, भोले, नीलकंठ बन जाते हो,
डमरू पर अपने जब चाहो, प्रलय को नचाते हो।
फिर ऐसा क्या है, भोले, जो नहीं सुन रहे पुकार?
खोलकर जटा, भोले, ढक दो अब आकाश।
खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।

RSD

भोलेनाथ मेरे नाथ


भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ,
मधुर बहुत है, पिता, आपका लगता मुझको नाम।
कानों में अमृत घुल जाए, हों स्वप्न सब साकार,
जब दिख जाते हो मुझको, भोले, झूमते नंदी पे सवार।

भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे नाथ,
और क्या माँगे, भोले, जब बैठे ही हैं तेरे द्वार?
एक बार चखा दो, पिता, अपने हाथों से बस भांग।
जीवन हो जाए पूर्ण, पिता, जो तुम पिला दो भांग।

भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे नाथ,
क्या है अमृत और क्या है विष, जो तेरी गोद में खेला।
मन तो माँगे बस, हाँ भोले, डम-डम डमरू,
और तुम्हारे हाथों से, भोले, बस थोड़ी-सी भांग।

RSD

भांग अपनी ये मीठी


आँखे मेरी, तुम्हारे दरस की प्यासी
प्यास मिटा दो हे अविनाशी।
सबको यहाँ, मिल गया कुछ -ना – कुछ
कब होगी प्रभु, हमपे कृपा तुम्हारी।
क्षमाप्राथी है ह्रदय मेरा, भुला कर पाप मेरे
अब तो चखा दो भांग अपनी ये मीठी।
कब तक रखोगे यूँ दूर-दूर अंक से अपने?
चरणों में तुम्हारे पिता, सिमटी है दुनिया ये सारी।
सबकुछ भुलाकर बस इतना ही चाहा
जन्म-जन्म तक धोता रहूं चरण तुम्हारी।
आँखे मेरी, तुम्हारे दरस की प्यासी
प्यास मिटा दो हे अविनाशी।

RSD

भोलेनाथ आपकी जो कृपा हो जाए


भोलेनाथ आपकी जो कृपा हो जाए
ये भगीरथ भी सनाथ हो जाए.
है जीवन में मेरे भी कुछ अभिलाषा हाँ प्रभु
आप देख लो, तो सारी ही पूर्ण हो जाए.
आप त्रिपुरारी, त्रिलोकी, महादानी भोलेनाथ
आप देख लो, तो रघुकुल का कल्याण हो जाए.

आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला


मैं तन्हा -तन्हा सा एक मुसाफिर हूँ भोला
मैं भटक रहा हूँ, इतना काफिर हूँ भोला।
बस दो ही पल संग मुझे बिठा ले ए भोला
आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला।
मैं लुटा-हारा सा एक स्वार्थी, तू महादानी ए भोला
मैं भटक रहा हूँ, इतना पापी हूँ भोला
बस दो ही घडी, चरणों में बिठा ले ए भोला
आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला।
मैं माया-मोह में तू निर्मोही ए भोला
मैं भटक रहा हूँ, इतना कपटी हूँ, भोला।
बस दो ही क्षण गले से लगाले ए भोला
आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला।

RSD

हमार जोगिया


डिम -डिम डमरू बजावे ला हमार जोगिया
रे हमार जोगिया।
मंद -मंद मुस्काये ला हमार जोगिया
रे हमार जोगिया।
दिन-भर बसहा घुमाये ला हम्मर जोगिया
रे हमार जोगिया।
बस भांग-धतूरा ही चाहे ला हमार जोगिया
रे हमार जोगिया।
दिन-भर गंगा में नहाये ला हमार जोगिया
रे हमार जोगिया।

हमार जोगिया हो हमार जोगिया


डम-डम डमरू बजावे हमार जोगिया
हमार जोगिया हो हमार जोगिया।
बस भांग-धतूरा से ही खुश हो जाए
हमार जोगिया हो हमार जोगिया।
अइसन सीधा नु बाटे हमार जोगिया।
हमार जोगिया हो हमार जोगिया।

दिन-भर नंदी संग घूमे ज्वार जोगिया,
हमार जोगिया हो हमार जोगिया।
माथे पे चंदा, ललाटे भभूत
देहिया पे भुजंग झुलावे हमार जोगिया।
हमार जोगिया हो हमार जोगिया।

RSD

मेरे शिव, ये अहंकार मिले तुमसे


टूटे हुए ह्रदय को, झंकार मिले तुमसे
तुम मेरे हो, मेरे शिव, ये अहंकार मिले तुमसे।
तुम अनंत, तुम असंख्य, मैं नगण्य एक धूल कण
तुम्हारे चरणों में रहूं, ये मान मिले तुमसे।
तन तो रहा न रहा, मन में तुम हो सदा,
डूबता ही जा रहा हूँ, ऐसे फंसा हूँ इसमें
आँखों को सुलभ नहीं दर्शन, पर आशीर्वाद मिले तुमसे।
कब तक मैं पुकारूँ, इतना तो बता दो पिता
और कुछ तो नहीं माँगा, बस लाड मिले तुमसे।

Rifle Singh Dhurandhar

मेरे शिव तुम्हे प्रणाम


मेरे दाता, विधाता, ऐसे भुला ना ये नाता
जग में मैं जी रहा हूँ, बस लेकर एक ही नाम.
मेरे शिव तुम्हे प्रणाम, मेरे भोले तुम्हे प्रणाम।
मेरे शिव तुम्हे प्रणाम, मेरे भोले तुम्हे प्रणाम।

हठ करे बालक तो ये तो जग की शोभा है
तुम पिता हो मेरे,खुद को हठ में न बांधों.
मेरी गलतियों को भुलाकर रखना मेरा ध्यान।
मेरे शिव तुम्हे प्रणाम, मेरे भोले तुम्हे प्रणाम।

एक विनती पे, भगीरथ के, तुम थे दौड़े आए
बाँध के गंगा को लहरों में, मेरे शिव थे तुम लहराए।
फिर क्यों हैं अनसुनी प्रभु मेरी हर पुकार?
मेरे शिव तुम्हे प्रणाम, मेरे भोले तुम्हे प्रणाम।

मैंने रखी है ह्रदय में हर पल तुम्हारी छाया
फिर तन-मन पे मेरे क्यों है, काम-क्रोध की माया।
हो मेरा भी उत्थान दे दो पिता ये आशीर्वाद।
मेरे शिव तुम्हे प्रणाम, मेरे भोले तुम्हे प्रणाम।

Rifle Singh Dhurandhar

मैं भी नीलकंठ बनूंगा


गहन अध्ययन कर के विद्वान् बनूंगा
हे शिव मेरे, आशीर्वाद दो मुझे
की अब मैं भी महान बनूंगा।
अभी बालक हूँ, बालपन में भटकता हूँ
हे शिव मेरे, आशीर्वाद दो मुझे
मैं भी भगीरथ बनूंगा।

तुम त्रिकाल हो, त्रिपुरारी हो
तुम अनंत तक के विस्तार में
तुम ही गंगा, तुम्ही काशी
तुम जीवन की हर एक धार में
हे शिव मेरे, आशीर्वाद दो मुझे
विषपान कर मैं भी नीलकंठ बनूंगा।

Rifle Singh Dhurandhar