इश्क़


मुझे इश्क़ में दर्द मिला
मुझे दर्द में इश्क़ मिला
मैं तन्हा रहा जिसकी चाह में
वो मुझे अंत में तन्हा मिला।

वो सुहागन, पत्नी, माँ, बहु, सास
ऐसे भी बनती, वैसे भी बन गयी.
उसे सिंदूर, साड़ी, पायल, कंगन
ऐसे भी मिलते, वैसे भी मिल गयी.

मेरे हालात कैसे भी हों?
उसे तब पैसों की चाह
और अब मोहब्बत की
प्यास रह गयी.

Rifle Singh Dhurandhar

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