बेइन्तहा मोहब्बत की


बेइन्तहा मोहब्बत की
मंजिल सिर्फ तन्हाई है
आज जिनकी बाहों में तुम हो
कल उनसे ही तुम्हारी जुदाई है.

रुत बदल जाए, रब बदल जाए
जहाँ पतझड़ है, वहाँ बहार भी आ जाए.
मगर मौत के अलावा
ना इस दर्द की कोई दवाई है.
बेइन्तहा मोहब्बत की
मंजिल सिर्फ तन्हाई है.

तुम ना समझे
तो ये तुम्हारी नादानी है.
वो समझ गए
तो उनकी किस्मत में शहनाई है.

जितना पुकार लो
ना लौट के कोई आएगा।
जिंदगी में बस एक ही बार
होती ये सगाई है.
बेइन्तहा मोहब्बत की
मंजिल सिर्फ तन्हाई है.

RSD

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