सारी रात आज बिहार लिखूंगा


अपनी मोहब्बत का मैं दास्ताँ लिखूंगा
तुम्हारे जिस्म पे सारी रात आज बिहार लिखूंगा।
तेरी कमर को छपरा, वक्षों को सिवान लिखूंगा
तुम्हारे जिस्म पे सारी रात आज बिहार लिखूंगा।
तेरे अधरों को लिट्टी, गालों को चोखा
उसपे इन आँखों को आम का आचार लिखूंगा।
तुम्हारे जिस्म पे सारी रात आज बिहार लिखूंगा।
तुम्हारें पावों को धुरौन्धा, बाहों को पटना,
ढोंढ़ी को अपना मलमलिया बाजार लिखूंगा।
तुम्हारे जिस्म पे सारी रात आज बिहार लिखूंगा।

RSD

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