कवि


ए कवि, तेरे चेहरे पे
एक ग़ज़ब का नूर है।
तू ग़रीब, पर तेरी हस्ती बेजोड़ है।
एक छोटी-सी मुस्कान पे हुस्न के
तूने लिखी कितनी अदाओं की दास्ताँ।
आज ज़माने में हर तरफ़ बस
बिक रहा है सजने का सामान।

RSD

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