ये मस्तियाँ आँखों की शराब बन गयी हैं
इन्हें और ना रोको, ये छलकने को बेताब हो गयी हैं.
तुम तो दूर हो गए चंद पल के मेहमान बन के
बस तुम्हारी चोली की कतरने रह गयी हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
ये मस्तियाँ आँखों की शराब बन गयी हैं
इन्हें और ना रोको, ये छलकने को बेताब हो गयी हैं.
तुम तो दूर हो गए चंद पल के मेहमान बन के
बस तुम्हारी चोली की कतरने रह गयी हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
इन आँखों में
नशा है
हया है
वफ़ा है
मगर सनम
ये आँखें बेवफा हैं.
कातिल हैं, कुटिल हैं
चतुर हैं, निपुण हैं
इनमे स्वर्ग की आभा है.
मगर सनम
ये आँखें बेवफा हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
वो दिल मेरा था जिसे तुझे दे दिया था
वो जिसे तुमने तोड़ा, वो तो तेरा ही दिल था.
परमीत सिंह धुरंधर
तू भी है राणा का बंसज
फेंक जहाँ तक भाला जाए.
मधुवन के शौक़ीन सभी हैं
तो रण में बिगुल कौन बजाए?
धर्म-अधर्म की बाते छोड़
गांडीव पे अब तीर चढ़ा.
उनकी आँखों में बस छल है
फिर क्यों तू अपना प्रेम दिखाए?
छल-कपट में पारंगत वो
तू फिर क्यों नियम गिनाए।
वो चढ़ आए रणभूमि तक
लहू के तेरे प्यासे होकर।
फिर क्यों तू खुद को यूँ
रिश्तों में जकड़ा पाए.
तू भी है राणा का बंसज
फेंक जहाँ तक भाला जाए.
Two lines (तू भी है राणा का बंसज. फेंक जहाँ तक भाला जाए. ) were written by Dr. Kumar Vishwas.
परमीत सिंह धुरंधर
जीत-हार तो श्रीकृष्ण के हाथ है
फिर कर्म को किस्मत से क्यों बांधा जाए?
तू भी है राणा का बंसज
फेंक जहाँ तक भाला जाए.
Last two lines (तू भी है राणा का बंसज. फेंक जहाँ तक भाला जाए. ) were written by Dr. Kumar Vishwas.
परमीत सिंह धुरंधर
तू भी है
राणा का बंसज
फेंक जहाँ तक
भाला जाए.
जीत – हार तो
श्रीकृष्ण के हाथ है
कब तक जीवन यूँ जीया जाए?
अश्वों को थाम के
उतर जा कुरुक्षेत्र में
कब तक भोग -विलास में
समय बिताया जाए?
माना की तेरे नसीब में
यौवन का सुख नहीं
तू ही बता फिर धरती पे
किसे महाराणा बुलाया जाए?
गर नहीं विश्वास
तुझे ही लहू का
तो फिर कितना तुम्हे?
इतिहास पढ़ाया जाए.
सब हैं अमृत के प्यासे
किसकी प्यास गरल से बुझाई जाए?
प्रचंड-प्रबल वेग से गंगा
आतुर है सृष्टि को मिटाने को
काल को जो बाँध ले
उस महाकाल को क्यों न पुकारा जाए?
जीवन उसी का सार्थक है जग में
युगो -युगो तक जिसका नाम गाया जाए.
परमीत सिंह धुरंधर
First two lines (तू भी है राणा का बंसज. फेंक जहाँ तक भाला जाए. ) were written by Dr. Kumar Vishwas.
तमाम उम्र तुम्हारा इंतज़ार हम करते रहे.
इस इंतज़ार में किस – किस को प्यार हम करते रहे (by Bhagwan Shahani).
अब भी आ जाओ कुछ नहीं बिगड़ा
अब भी हम इंतज़ार करते हैं (by Nusrat Fateh Ali Khan).
चाँद मेरी आँखों का इशारा जानता है
क्या करता है क्राससा, ये ज़माना जानता है.
अच्छा है की तू मेरी ना बनी
अब भी तेरे पीछे, ये दिल – दीवाना भागता है.
Wrote the last paragraph to express the same feeling “इंतज़ार”.
परमीत सिंह धुरंधर
ना खुदा मिला ना खुदाई
हर दर पर सजदा कर बैठे।
एक तुझको भुलाने के लिए
किस – किस से मोहब्बत कर बैठे।
परमीत सिंह धुरंधर
सारी नगरिया में चर्चा बा रउरे आमदनी के
सुनी ए बाबूसाहेब छपरा के धुरंधर
खर्चा उठा ली हमर जवनिया के.
हमरा खूंटा से कउनो गाय ना तुराईल आज तक
फंस जइबू रानी, रहे के पड़ी
साड़ी उम्र फिर संगे कोठारिया में.
परमीत सिंह धुरंधर
नजर है, नजाकत है
अदा में अदावत है.
कमर है, क़यामत है
खुदा की इनायात है.
ना रखा करो यूँ पर्दा
बस ये ही तो एक शिकायत है.
परमीत सिंह धुरंधर