पीता बहुत हूँ मैं तेरे नाम पे
जिन्दा हूँ अब तक बस तेरे आस में.
पता है की तुम अब कभी ना लौटोगे
पर मजा बहुत है इस झूठे इंतजार में.
परमीत सिंह धुरंधर
पीता बहुत हूँ मैं तेरे नाम पे
जिन्दा हूँ अब तक बस तेरे आस में.
पता है की तुम अब कभी ना लौटोगे
पर मजा बहुत है इस झूठे इंतजार में.
परमीत सिंह धुरंधर
धरा पे मैं फिर से
कोई भगीरथ बनूँगा क्या?
मेरे लिए हे शिव,
आप अपनी जटायें खोलेंगे क्या?
जब मन भय से ग्रस्त हो
कर्म पे बढ़ा अटल हो
मैं पुकारूँ,
तो हे शिव आप मेरे लिए आवोगे क्या?
मैं छोडूंगा नहीं हे शिव चरण तुम्हारे
तुम सुनो, ना सुनो,
रहूँगा तुम्हे पुकारते
मुझे यूँ आँखों की धारा में
हे शिव डूबता छोड़ोगे क्या?
परमीत सिंह धुरंधर
ना रखा कर रुख पे यूँ पर्दा मेरी जान
चाँद के दीदार का हक़ हमें भी है.
परमीत सिंह धुरंधर
ये रौशनी चेहरे पे, ये सादगी चेहरे पे
किस्मत में फासला लिख गया
वरना रखते हम आपको
जीवन भर अपनी पलकों पे.
परमीत सिंह धुरंधर
शहर को क्या पता है किस्मतें -द्वन्द का?
मेरे दिल से पूछों जिसे नशा है तुम्हारे अंग – अंग का.
उलझनों में बांध के क्या मोहब्बत करोगे?
ख्वाइस तुम्हे दौलत की और मुझे तुम्हारे वक्षों का.
राहें बदल – बदल कर कौन सी मंजिल पा लोगे?
स्थिर होने पे बुद्ध के, द्वार खुला था ज्ञान का.
परमीत सिंह धुरंधर
कल रात मेरे सपने में सरदार पटेल आये और बोले इस जन्म में वो ही अमित शाह के रूप में भारत की सेवा को अवतरित हुए हैं. कश्मीर का जो काम अधूरा रह गया था वो इस बार पूरा कर के जायेंगें।
मैंने जैसे ही पूछा की नेहरू जी भी अवतरित हुए होंगे क्यों की वो कैसे ये देख सकते हैं? लेकिन सरदार पटेल कुछ बोलते उसके पहले ही वो अदृश्य हो गए और मेरी निंद्रा टूट गई. अब मन और भी व्यथित है की आखिर वो मेरे ही सपने में क्यों आएं? या ऐसा है की वो हर भारतीय के सपने में आये या आ रहे है और ये बात बता रहे हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
मेरी कुछ सरहदे हैं
तुम्हारे कुछ रास्ते
दोनों मिल जाएँ
तो फिर अपनी रियासते।
सत्ता पे बैठे लोगो को
हम घेर लेंगें
तुम साथ चलो तो
तुम्हे भी कुछ सुन लेंगे।
ह्रदय को भाने
लगी हो तुम
तुम फूल बनकर खिलो तो
हम भौंरा बन लेंगे।
तुम्हारी नजर का तीर
अभी तक मेरे जिगर में है
तुम कहो तो
इस जख्म के साथ जी लेंगें।
परमीत सिंह धुरंधर
कण – कण में व्याप्त है श्रीराम
चाहे अयोध्या हो या अंडमान।
मंदिर बने या ना बने
जयकारों में गूँजते रहेंगे श्रीराम।
भूमण्डल के हर कोने – कोने मे
जन – जन के ह्रदय में है श्रीराम।
परमीत सिंह धुरंधर
सखी, कैसे सुनाई आपन दुखड़ा
बारन अनाड़ी हमार सैंया।
सब कोई हो गइल भवसागर पार
मोदी – मोदी जाप के.
बस डूब गइलन हमार सैंया
फंस के महागठबंधन के माया-जाल में.
परमीत सिंह धुरंधर