Crassa…..


बहुत कमीने हैं, इस सारे संसार में,
मानते है सब लेकिन,  Crassa ही सरदार रे.
दूर-दूर से ही जाती हैं, सारी सुंदरियां,
न जाने कब लुट जाए,उनका  सारा श्रृंगार रे….Crassa

संग Crassa के रहने वो लगीं…..


रौशनी इस कदर, वो आँखों की बनी,
अँधेरा अब कहाँ, इस जिन्दगी में है.
पास आके बाहों में, वो सिमटने हैं लगीं,
तमन्ना अब कहाँ, कोई इस जिन्दगी में है.
उन्हें भोला मैं कहूँ, या तकदीर अपनी,
चाँद होके आसमाँ का, संग परमीत के रहने वो लगीं….Crassa

गुरुर


वो मशहूर है अपने हुस्न से,
उन्हें गुरुर है अपने हुस्न पे,
कभी सामना तो करे Crassa का,
ना हुस्न रहेगा ना गुरुर उनका परमित

एक लड़की का भोला दिल


एक लड़की का भोला दिल,
बोला,
एक शाम को,
खेलोगे क्या मेरे साथ,
छत्री  फूटबाल,
एक शाम को.
शातिर है , शैतान है छत्री ,
आँखों में एक चमक आ गयी,
बोला,
खेलूँगा, मगर
सिर्फ मैं रात को.
विनती हुई, गुहार हुई,
छत्री  के चरणों में गिरी,
एक हसीना ने प्रेम-गुहार की.
मुकाबला हुआ,
एक भोली लड़की का एक शैतान से,
शुभारम्भ हुआ , हंग्कोक पे ,
मीठे-मीठे दो जाम से.
पसीने-पसीने हो गयी ,
एक सीधी सी लड़की,
निष्ठुर है, चालक है छत्री ,
खूब छकाया, उसे
एक रात को……Crassa

एक लड़की १६ साल की Crassa की दीवानी हुई……….


एक लड़की, १६ साल की इतनी निखरी हुई,
चढ़ती जवानी से,  जिसकी चाल बिगड़ी हुई,
जब से देखा है उसने Crassa की तस्वीर ,
आरमान उसके दिल की, अब जगी जगी हुई,
की लगा के आँखों में वो काजल, वो Crassa   के सपने सजाती हुई,
कानों के बजते है जब झुमके, तो Crassa की गीत गाती हुई,
एल लड़की १६ साल की, इतनी पतली सी,
चढ़ती जवानी से, जिसकी चाल बिगड़ी हुई,
पाने को Crassa को, हर सोमवार शिव-मंदिर जाती हुई,
एक लड़की १६ साल की, Crassa की दीवानी हुई,
सब्जी बनाने की हल्दी, तन से लगाती हुई……Crassa

चरित्रा शुभकर


लूटकर कितनी माँ का आँचल,
बैठी है वो  दर पर अपने आँचल को फैलाकर.
वो खुश है अपने दामन में  खुशियों को पाकर,

और नाम रखा है उसका चरित्रा शुभकर.
सोच-सोच कर आने वाले कल को,
हर्षित हो उठता है उनका चितवन,
और मेरी  आँखे देख रही है, परमित
बिलखते हुए फिर किसी माँ का तन-मन…….Crassa