तन्हाई


हिज्र में तुम्हारे रहा न मुझ सा कोई
जो वो समझे मेरी ये तन्हाई।

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मोहब्बत मेरी एक इबादात है


एक तू ही नहीं है और भी हैं यहाँ
इनके लिए सज-संवर के है धरा.
दिल तोड़ो ना कभी किसी का
हर दिल में बैठा है खुदा यहाँ।
मोहब्बत मेरी एक इबादात है
ना मानते हैं वो, ना ही माने खुदा।

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राहगीर


उनकी जुल्फ के कई हैं राहगीर यहाँ
पर कोई बसा न पाया अपनी जागीर यहाँ।
ग़ालिब-से-मीर तक, सबकी रही एक ही तकदीर यहाँ
कोई बंधा जंजीर से, कोई बनके रहा बजीर यहाँ।
वो तो सेज से, सेज पे ही रही यहाँ
मैं बैठा रहा ताउम्र लिए एक तस्वीर यहाँ।

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चूड़ियाँ


मैंने उन आँखों में बस शर्म को ही देखा
खेलता उस शर्म से कोई और है.
खरीदता ही रह गया मैं चूड़ियाँ
पहनाता उसे और तोड़ता कोई और हैं.
और कैसे मांगू रब बता, जिसे मांगता हूँ तुझसे
तेरे ही दर पे उसे अपनाता कोई और है.

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जवानी


आग लगा दो पर्वत में अगर छाई तुमपे जवानी है
ना मिली उनकी जुल्फ तो क्या, अपनी भी एक कहानी है.
टुटो, टुटो तुम बार बार ऐसे, की चोट हर बार तुम्ही पे हो
अधरों पे वो प्यास बसा लो, जहाँ हर दरिया सूख जानी है.

The image was taken from google search from the link https://www.mcgill.ca/newsroom/channels/news/mountain-fires-burning-higher-unprecedented-rates-331540

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छपरा


खुदा तेरी चाहत का ये कैसा मिसरा है
लिखता हूँ तेरा नाम और लिख जाता छपरा है.
किस दर पे तेरे आऊं सजदा करने को
तेरे दर की कोई भी राह लूँ, वो ले जाती बस छपरा है.

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वक्षों पे चोली कस रही हैं


बहुत मुश्किलों में हैं मेरा, जिंदगी हर मोड़ पे छल कर रही है
प्यास मेरी है की मिटती नहीं, और वो अपने वक्षों पे चोली कस रही हैं.
मुझे यूँ ही बहका के हर बार वो पीछे हट जाती हैं
मेरी मोहब्बत, मेरी प्यास सबको वो वासना कह रही हैं.

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मोहब्बत


किसी को भी यकीं नहीं उनसे मेरी मोहब्बत का
ज़माना देखता है चेहरा, नहीं दिल मेरा, ऐसा ही है हुस्न उनका।

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इंसान


मौसम के बदल जाने से बदल जाते हो तुम
तुम्हारी सोहबत में नहीं लेकिन बदले हम.
इंसानों की बस्ती में कई इंसान भी ऐसे हैं
जिन्हे कहते भी नहीं हैं कभी इंसान हम.
इरादा ही रखते थे तन्हा होने का हम
उनको कहते ही नहीं हैं कभी बेवफा हम.

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ख्वाब


कहाँ बैठे हो हमसे दूर जाकर
आवो कोई ख्वाब बुने, बाहों को उलझाकर।

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