अमावस की रात


रहनुमाओं की खोज में, हसरतें जवाँ हो गयी,
जवानी के जोश में हम तनहा रह गए.
कब तक उछालोगे ये आज़ादी का जश्न,
सबको खबर हो चुकी है, ये रात हमें खोखला कर गयी.
और बेइंतहा मोहब्बत करते थे सितारों से हम,
अमावस की रात को, कत्ले-आम मच गयी.
अब ना हम हैं, ना वो हैं, ना जवानी का वो गुरुर,
मुफलसी है, तन्हाई है, और थोड़ी साँसे बच गयी.

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मत


तेरी चाल पे तो तख्ते-ताज पलट गए,
ये हम हैं जो फिर भी संभल गए.
तुझे पाने को बाह गयी खून की नदियां,
जाने कैसे इस सैलाब से हम निकल गए.

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


तेरी जुल्फों में सोया करता था,
अब तन्हा-तन्हा फिरता हूँ.
बहुत मगरूर था जिस मोहब्बत पे,
अब उसी का मातम करता हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

ए जालिम


उम्र ऐसे ये ढलने लगी हैं,
मेरी नजर तेरे सीने पे लगी है.
कभी मुझसे भी आके मिल, ए जालिम,
मोहब्बत अब अगन बन गयी है.
तेरी मंजिल मेरी ये तड़प हैं,
मेरी चाहत है पाना तुझे।
अपनी ये जिद छोड़ भी दे, ए जालिम,
जिंदगी अब कहर बन गयी है.
लगेगी रोज भीड़ तेरी दीदार पे,
जिंदगी है तनहा ये बिना तेरे श्रृंगार के.
पर्दा ये अब हटा भी दे, ए जालिम,
दुरी ये अब जहर बन गयी है.

परमीत सिंह धुरंधर

खालीपन


तेरी आँखों का कालापन,
मेरे मन का कुँवारापन।
एक है सागर की गहराई लिए,
और एक में, दहकते रेगिस्तान का सूनापन।
तेरी योवन का ये अकेलापन,
मेरे मन का ये बंजारापन।
एक है हिमालय सा उन्नत,
और एक में अनंत बसा ये खालीपन।

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


तेरी मोहब्बत का क्या सिला दें,
हम निगाहों से पीते हैं, तुम चेहरे पे हिजाब रखते हो.

परमीत सिंह धुरंधर

दिल


क्या – क्या संभालोगे इस जहाँ में,
एक दिल तो तुम्हारा संभालता नहीं।
इतने ठोकरों को खा के मोहब्बत में,
नदाने-इश्क़ तुम्हारा छूटता नहीं।

परमीत सिंह धुरंधर

यार


गैरों की बाते करने की किसको फुर्सत,
हम तो एक यार के पीछे जिंदगी गुजार गए.

परमीत सिंह धुरंधर

इश्क़


इश्क़ रातों को रोता हैं,
हुस्न के पास तो जमाना है मुस्कराने को.
सोचो, उस माँ पे क्या गुजरती होगी,
जिसका बेटा कमाता है, मयखाने में लुटाने को.

परमीत सिंह धुरंधर

नथुनिया


रोज करेलअ,
छपरा, सीवान, मलमलिया।
सैयां कहिया आई,
हो नथुनिया।
तानी सबर धरअ न,
साथे ले आइम पैजनिया।
खूब बोलेलअ,
चाँद, चंदा, चंदनिया।
सैयां कहिया आई,
हो नथुनिया।
तानी सबर धरअ न,
साथे ले आइम पैजनिया।
रोज काटेलअ,
गेहूं, धान, धनिया।
सैयां कहिया आई,
हो नथुनिया।
तानी सबर धरअ न,
साथे ले आइम पैजनिया।
सबके पढ़ेलअ,
कथा, कहानी, चिठिया।
सैयां कहिया आई,
हो नथुनिया।
तानी सबर धरअ न,
साथे ले आइम पैजनिया।

परमीत सिंह धुरंधर