जिसकी एक चाल पे दुनिया मिट गयी,
जाने कैसे हमने अपनी साँसों को संभाला है.
परमीत सिंह धुरंधर
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जिसकी एक चाल पे दुनिया मिट गयी,
जाने कैसे हमने अपनी साँसों को संभाला है.
परमीत सिंह धुरंधर
अब भूख लगी है,
प्यास मिटने के बाद,
की रात का इंतज़ार नहीं होता,
मंडप में तुम्हे देखने के बाद.
छोड़ो, ये सात-फेरों की रस्में,
मेरी किस्मत पे एतबार नहीं,
ए मालिक,
तुझे देखने के बाद.
बहुत दूर से आया हूँ,
तुम्हे अपना बनाने को.
अब पर्दा बर्दास्त नहीं होता,
यूँ नजरे मिलाने के बाद.
परमीत सिंह धुरंधर
शाम होते ही उनकी तलब होती है,
मोहब्बत जिंदगी बदल देती है.
रहम की भीख क्यों और किस से मांगे,
मेरी आंसूओं पे ही वो मुस्करा देती है.
परमीत सिंह धुरंधर
अब मोहब्बत में क्या पाक रहा दोस्तों,
जब इसमें भी पैसो का हिसाब होता है.
परमीत सिंह धुरंधर
चाँद के दाग के कौन देखता हैं,
हर नजर यहाँ सितारों के टूटने पे लगी है.
परमीत सिंह धुरंधर
यूँ न रूठो तुम की जिनगी मौत सी लगे,
डूबकर आँसूओं में एक प्यास होंठो पे जगे.
परमीत सिंह धुरंधर
नजरे मिलानी ही है तुझे तो फिर ये पर्दा न कर,
और बाँध रखा है अगर हया ने तो मुझे यूँ बुलाया न कर.
परमीत सिंह धुरंधर
रौशनी वो ही की फिर अँधेरा ना हो,
और चुम मुझे ऐसे की फिर सबेरा ना हो.
परमीत सिंह धुरंधर
नदिया बोली सागर से,
इश्क़ तेरा झूठा है.
मैं आई इतनी दूर से,
प्यार में तेरे भागी -भागी।
तू एक कदम भी ना आगे बढ़ा,
प्यार तेरा छोटा है.
सागर बोला सुन प्रिये,
प्यार मेरा ही सच्चा है.
तू बहती है तोड़ के,
हर रिश्ते, मर्यादा को,
मैंने संभाला के रखा है,
अपने किनारों को.
तू राह बदल दे जब भी चाहे,
मैंने बाँध रखा है,
अपनी धाराओं को.
ऐसा नहीं की मुझे तेरी चाह नहीं,
पर डरता हूँ तेरी चंचलता से.
वरना आज भी,
मेरे इन अधरों पे,
तेरा चुम्बन वो ताजा है.
और मेरी बाहें तेरे जिस्म से,
आज भी महका-महका है.
परमीत सिंह धुरंधर
हर सीरत का एक सूरत है, हर सूरत में सीरत नहीं,
हर जोड़े में एक इश्क़ हैं, हर इश्क़ का जोड़ा नहीं।
परमीत सिंह धुरंधर