तेरे इश्क़ में


मैं बहुत प्यासा, रह गया तेरे इश्क़ में
बन के एक, तमाशा रह गया तेरे इश्क़ में.
दुनिया सुकून से जी रही है घर बसा के
मैं बंजारा रह गया तेरे इश्क़ में.
चाँद लकीरों की बात नहीं है मोहब्बत
सिक्कों का खेल है
जिसने भी उछाला, ले गया तुझे
करता मैं सजदा रह गया तेरे इश्क़ में.
खुदा इतना कठोर है मुझे नहीं पता था
अपनी तरफ उसे समझता रह गया तेरे इश्क़ में.

किस-किस ने ना लुटा एक तेरे लूटने के बाद
मैं बूत सा देखता रह गया तेरे इश्क़ में.

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शर्म बहुत है


निगाहों का असर ही कुछ ऐसा है
वो ही लुभाती हैं जिनमे शर्म बहुत है.
तेरी जुल्फों के सायें में काट जाए बस एक रात
अपनी जिंदगीं के लिए इतना ही बहुत है.

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1-2-3


इस बार की होली को रंगीन कर देंगे
तुम कहो तो जुर्म कोई संगीन कर देंगें
जितनी भी शिकायतें हैं साल भर से तुम्हारी
मिलते ही सबको १-२-३ कर देंगें।

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यूँ ही खड़ा नहीं हूँ तेरे शहर में


यूँ ही खड़ा नहीं हूँ तेरे शहर में
मेरे सर पे आशीष बहुत है.
वो कहते हैं की मैं उनका दीदार नहीं करता
मेरे दुश्मनों के महफ़िल में वो बैठता बहुत है.
जिनके सीने में दिल है कह दो खुदकुशियां ना करें
शहर में अब खुलने लगी दुकाने बहुत हैं.
इश्क़ में कटरीना नहीं तो मलिक्का बहुत हैं
जिन्हे वो भी नहीं, उनके लिए मिया खलीफा बहुत है.
रात में हर किसी का भरोसा नहीं करते
यहाँ अंधेरों में चलते खंजर बहुत हैं.
तुम जिसे चाँद कह रहे हो शहर का
उसमे तो दाग बहुत है.

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Dreams


Massechutes, Boston, and Harvard
A dream that I chased at the
cost of my motherland.

I prefer walking
In the morning Dew to
a night full of dreams.

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चुनना सपेरा कोई बिहारी को तुम


आँखों में मदिरा, अधरों पे अंगार हैं
तेरी चढ़ती जवानी जैसे मेरा बिहार है
वहाँ गंगा की धार, यहाँ तेरे नयनों के बाण हैं
वहाँ नितीश कुमार, यहाँ तेरी हिरणी सी चाल हैं
वहाँ लिट्टी, घी, अँचार, यहाँ तेरे सोलह श्रृंगार हैं
वो सब मेरे ह्रदय में और तू भी विराज है.
कौन कहेगा तुझे वेवफा
तेरे संग एक रात पे ता उम्र निसार है.

मिश्री की कोई डाली हो तुम
या चासनी में ताली हो तुम.
तुम्हारे वक्ष जैसे पहली की क्यारी हो तुम
तुम्हारे कमर जैसे मेरे खेतों में गेहूं की बाली हो तुम.
जो भी हो जैसी भी हो पर प्यारी हो तुम
देखो, चुनना साथी कोई बिहारी को तुम.
नैनों से कातिल, और कमर से कंटीली हो तुम
नागिन कोई नवेली हो तुम.
पर देखो, चुनना सपेरा कोई बिहारी को तुम.

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मोहिनी मनचली हो तुम


गजब कमसिन-कली हो तुम
जवानी में ऐसी ढली हो तुम
चांदनी वर्फीली हो तुम
मोहिनी मनचली हो तुम
झंकृत जिससे ह्रदय मेरा
रागनी कोई नई हो तुम
डंस रही हो जान-मानस को
नागिन कोई नवेली हो तुम.
कैसे आँखे फेर ले हम
जब लगती मन को भली हो तुम.
नाजुक छुई-मुई सी हो तुम
शाम गोधूलि हो तुम

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ललुआ – भइल, भलुआ -भइल


दर्द की रात ये ढलती नहीं,
पीता हूँ मगर ये चढ़ती नहीं।
कोई तो हो जो जिक्र छेड़ दे उनका जरा
इस ठंढ में आँसू पिघलती नहीं।

मिला जो मोहब्बत तो तू खुशनसीब है
वार्ना फिर मयखाना ही नसीब है.
उम्रभर की ख्वाइशें रख दी समेटकर तेरे जिस्म पर
वो एक जिस्म भी ना मिला तो ये कैसा नसीब है?
वक्त के थपेड़ों ने यूँ रख दिया उलझाकर
कोई भी एरा-गैर कह रहा की यही नसीब है.
बैठ जाएँ हारकर, हम ऐसे भी नहीं
बिहारियों ने अपने हाथों से लिखी नसीब है.
गंगा बाह रही है धरती पे, जाने किसके लिए
गंगा बाह रही हैं बिहार से, ये हमारा नसीब है.

कैसे कह दूँ की उनसे मुलाकात नहीं होती है?
जिस्म दूर है, पर बात रोज होती है.
आँखे मेरी आंसूं उनके, जिस्म मेरा सासें उनकी
मोहब्बत की रातें कुछ यूँ भी होती हैं.

ललुआ – भइल, भलुआ -भइल
फिर भी लागेलूं कमाल के
आवा ना रानी, बैठा ना रानी
बोरसी तपाल जाए आज साथ में

शरम करी, राम-नाम जपीं
अब छोड़ दिन इ-सब काम के
छापरहैया हैं
माज़ा मारेम जीवन के आखरी सांस ले

दामाद मिलल, बहू उतरल
फिर भी लागेलु सलोह साल के
आवा ना रानी, बैठा ना रानी
खा ल सतुआ आज साथ में.

शरम करी, राम-नाम जपीं
अब छोड़ दिन इ-सब काम के
छापरहैया हैं
माज़ा मारेम जीवन के आखरी सांझ ले.

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Shampoo


My sweetheart use shampoo on the boobs and its really helps us to ignite the night..

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चोली खोलके


चोर ले गइल चोली खोलके
रह गईनी हम ओठ दाब के
राजा, तहरे इजतिया के ख्याल रहल हो
ना त जार देतीं मुआना के बोरसी के अगिया से.

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