तू सिर्फ चाँद नहीं है


तेरी मोहब्बत में सिर्फ हम ही तन्हा नहीं हैं
जिसने भी देखा है तुम्हे, फिर चैन से बैठा नहीं है.

ए चाँद, तू सिर्फ चाँद नहीं है,
तू मंजिल है, जलन है, आग है, द्वेष है, इंतिजार है, इन तारों का.
तुम्हारा जिस्म, सिर्फ एक जिस्म नहीं है,
ये प्यास है, मयखाना है, अरे जाम हैं हम दीवानों का.
ये शाम, सिर्फ एक शाम नहीं है,
ये दर्द है, आंसू हैं, यादें हैं तेरी बाहों का.
ये बिहार, सिर्फ एक प्रदेश नहीं हैं,
ये नाम है राजेंद्र प्रासाद, जयप्रकाश, महामाया प्रसाद,
अरे नाम है भारत के मस्तक के सितारों का.

हमें याद है तेरी जुल्फों के साराएँ रातों का काट जाना
अब भी ये रातें तेरी यादों से ही कटती हैं.

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आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी


आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
तन से गंदे, पेट के भूखे, बिन पहने, कपडे
फिर से करेंगे तुम गोरों की चाकरी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
फिर जय-जय कारा, होगा तुम्हारा
तो क्यों खाई सालों तक सीने पे गोली
फीकी हैं तुम्हारे सौंदर्य के आगे हमारे शहीदों की कुर्बानी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी।

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कुमुदिनी


तुम छा रही हो ऐसे, जैसे छा जाती है बदली
मैं भ्रमित हो रहा हूँ ऐसे, जैसे भौंरा देख कुमुदिनी।
मेरे प्राणों से भी प्रिये लगने लगी हो पल में
जाने कल क्या होगा जब छलोगी बाहों में भर के

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इश्क़ की चाय


इश्क़ के नाम पे दुकान खोलेंगे
पहनाएंगे उन्हें चूड़ियाँ, ये ही काम करेंगे।
वो तो समझने से रहीं हाल-दिल हमारा,
हम बस उनको देख के दिल बहला लिया करेंगे।

ठंढी हवाओं का असर रात की तन्हाई है
समंदर से क्या पूछते हों की क्या होती बेवफाई है
वो तो चढ़ गयीं डोली हँसते-कूदते, पर उनकी एक शहनाई
की कीमत, लाखों बेबस माँओ की दुहाई है.

जवानी के ढलने में देर नहीं लगती
रेत के फिसलने में देर नहीं लगती
वादे सारे शिकवे हुए, और हसरतें कांटे
हुश्न को बदलने में देर नहीं लगती।

पत्थरों में हो संगीत
ऐसी हो मेरी प्रीत

मेरी साँसों की तपिस पे, इश्क़ की चाय बना के
अधरों का शहद मिला के, आँखों से पीला दे.

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आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी


मेरी तन्हाई में शोर बहुत है, इस शोर में मेरी तन्हाई बहुत है
तू मुझे मिली तो नहीं, पर मेरे लिए ये तेरा दर्द ही बहुत है.
दुनिया मुझे नहीं जानती, पर दुनिया जानती है, मैं बिहारी हूँ.
मेरी असफल जिंदगी में, मेरी गरीबी पे, मेरी भुखमरी पे, ये एक तमगा ही बहुत है.
तू जिन चरणों को छूकर, घमंड में चूर बहुत है.
उसे ठोकरों में तौला हैं कई बार मेरे पुरखों ने,
तू ले जा सारा इतिहास, मेरे इतिहास के लिए ये एक पंक्ति बहुत है.
तुम्हारी भूख, तुम्हारी सजावट, शौक, ऊंचाई, सफलता के लिए
मुबारक हो तुमको तुम्हारी अमीरी, मेरे लिए लिट्टी-चोखा ही बहुत है.

आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
तन ढकने को भी नहीं मैले -कुचैले कपड़े
खाने को नहीं दो रोटी
पर ये रानी तुम्हे देंगे भेंट में सोने की थाली
ये ही आगा हुयो है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
हम भूलें नहीं हैं वो १०० सालों की पीड़ा
ना भूल पाएंगे जालियावाला बाग़
पर ह्रदय पे पत्थर रख के, ये रानी, उतारेंगे हम तेरी आरती
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.

तुम्हारे लिए दिल के अरमान सजा के गुजारी मोहब्बत लम्हों में
तुम तो मेरे ना हुए कभी पर रहा मैं सदा तुम्हारे ही ख़्वाबों में.

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जो तुम्हारे दर्द को समझ सके, तो समझो उसका रिश्ता है सितम के किसी रात से
जो तुम्हे खिला दे लिट्टी-चोखा तो समझो उसका रिश्ता है बिहार से.

रो रही है जिन्हीने भी चुना है नॉन-बिहारी पति
अभी भी वक्त है तुम चुन लो कोई एक बिहारी।

जितने भी दर्द की रात है, उन सबमे तेरी याद है
हम क्या संभाले खुद को बता, जा हर २४ घंटे पे एक रात है.

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२०२४


२०२४ में चलो लेले सात फेरें
दुनिया को छोड़ो, हम रहेंगे साथ
दिल-दिमाग और जिस्म, २४क्स जोड़े।

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जिंदगी क्या है?


शहर में सभी को कुछ न कुछ मिला
मेरा नाम ले के उनको बहुत कुछ मिला
फिर भी गिला रखती हैं वो हम ही से
की सारे शहर में उन्हें मोहब्बत फिर कहीं ना मिला।
बदनाम खुद हुईं और हमपे तोहमत लगा गयी
की जिंदगी में उन्हें फिर कोई हम सा क्यों ना मिला?

जिंदगी क्या है?
नदी, ताल, तलैया, बहते जाना है
प्रेम क्या है?
दुःख, दर्द, काँटा, सहते जाना है
हुस्न क्या है?
छल, फरेब, धोखा, बचते जाना है.
बिहार क्या है?
घी, लिट्टी पे चोखा, खाते जाना है.

घी, लिट्टी पे चोखा, खाते जाना है.
होने पे बिहारी ना शर्माना है.
दुनिया भर का बोझा हमको उठाना है.
होने पे बिहारी ना शर्माना है.
पूरब-पश्चिम, उत्तर -दख्खिन,
कोने- कोने की गन्दगी हमको मिटाना है.
होने पे बिहारी ना शर्माना है.
भारत माँ का कोना-कोना साफ़-स्वच्छ बनाना है
होने पे बिहारी ना शर्माना है.

दुनिया को बिहारी एक गाली सी लगे
मुझे हर एक लड़की मेरे खूबसूरत बिहार सी लगे.

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मैं बिहारी हूँ


जिंदगी में कोई ख्वाइश नहीं
एक ख्वाइश पे लुटा दी जिंदगी।
एक पल ही सही वो मेरी बाहों. में थी
दो घड़ी ही सही, बहुत जी ली जिंदगी।
कोई मिल जाए इस प्यास को मिटाने को
तो क्या, कहीं खो गयी जब जिंदगी।

बहुत तोडा है एक शक्श ने मुझे
पर दिल ही की आज भी मचल जाता है उसपे।
कहीं दिख जाए, मिल जाए, टकरा जाए, तो वो निकल जाता है
पर दिल है की, उसके ओझल होने तक निहारता है उसे.

ए दोस्त तू नादाँ हैं, या परेशान है
तेरी आँखे कह रही की तू बिस्क में बीमार है.
क्या है जो धीरे-धीरे तू टूट रहा?
लगता है तेरे यार का आज ही निकाह है.
सोचता है की कब, कैसे और क्यों वो बदल गयी
तू अब भी नहीं समझा, ये हुस्ने-अंदाज है.

बहुत बेचैन हो जाता हूँ की कोई तेरे करीब है
लौट आ, तेरा यार अब बहुत अमीर है.
तूने छोड़ दिया की मैं बिहारी हूँ
कम-से-कम देख लेती कितनी हसीं मेरी जमीन है.

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एक पल तेरी आँखों ने जो इशारा कर किया
उम्र भर के लिए मुझे फिर आवारा कर दिया.
दो पल की इस ख़ुशी ने फिर
ताउम्र के लिए हमें तनहा कर दिया।
कितनी मंजिले बनी थी इन लकीरों पे
उन सबसे मेरी राहों को जुदा कर दिया।

मैं लिख रहा हूँ कविता तेरे प्यार में वो बबिता
तू सुनती नहीं तो जग को सूना रहा
मैंने खरीदें चूड़ी-कंगन, तेरे पावों के प्याल
तूने पहने ही नहीं तो जग में बाँट रहा.
एक पल आँख लड़ा के, तू भूल गयी दिल लगा के
तूने पूछा भी नहीं हाले-दिल तो मैं गमे-शब् गुनगुना रहा.
मैंने सोचा था एक घर बसा के, दीवारों पे तुमको सजा के
खिलाऊंगा लिट्टी -चोखा, तू मानी नहीं तो मैं सतुआ खा रहा.

उसने इरादा कर लिया था मुझे बर्बाद करने का
मैं भी बिहारी हूँ तो गोबर, गोइंठा, खप्पर, छप्पर सब चढ़ा गए.
इश्क़ में दुआओं का, दवाओं का, और फरियादों का कोई असर नहीं होता
जानते थे हम ये सब, जानते थे हम ये सब, पर उसकी आँखों में, आदाओं पे सब भुला गए.

धुप में – ना छावं में, मिलो मुझसे गावं में
कभी पनघट, कभी पोखर, कभी खलिहान में.
शहर मज़बूरी मेरी, ना यहाँ मैं किसी के चाह में
प्यार कब पनपा है, सवंरा हैं बंदिशों और घेराव में.
ना दिल्ली, ना महाराष्ट्र में, मिलो तुम हमसे बिहार में.

उम्मीदों के समन्दर को बाँध के निकला हूँ
जब से छोड़ा है गावं, बिहार, बस भटका और सिर्फ भटका हूँ.

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