इस बार की होली को रंगीन कर देंगे
तुम कहो तो जुर्म कोई संगीन कर देंगें
जितनी भी शिकायतें हैं साल भर से तुम्हारी
मिलते ही सबको १-२-३ कर देंगें।
RSD
इस बार की होली को रंगीन कर देंगे
तुम कहो तो जुर्म कोई संगीन कर देंगें
जितनी भी शिकायतें हैं साल भर से तुम्हारी
मिलते ही सबको १-२-३ कर देंगें।
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यूँ ही खड़ा नहीं हूँ तेरे शहर में
मेरे सर पे आशीष बहुत है.
वो कहते हैं की मैं उनका दीदार नहीं करता
मेरे दुश्मनों के महफ़िल में वो बैठता बहुत है.
जिनके सीने में दिल है कह दो खुदकुशियां ना करें
शहर में अब खुलने लगी दुकाने बहुत हैं.
इश्क़ में कटरीना नहीं तो मलिक्का बहुत हैं
जिन्हे वो भी नहीं, उनके लिए मिया खलीफा बहुत है.
रात में हर किसी का भरोसा नहीं करते
यहाँ अंधेरों में चलते खंजर बहुत हैं.
तुम जिसे चाँद कह रहे हो शहर का
उसमे तो दाग बहुत है.
RSD
Massechutes, Boston, and Harvard
A dream that I chased at the
cost of my motherland.
I prefer walking
In the morning Dew to
a night full of dreams.
RSD
आँखों में मदिरा, अधरों पे अंगार हैं
तेरी चढ़ती जवानी जैसे मेरा बिहार है
वहाँ गंगा की धार, यहाँ तेरे नयनों के बाण हैं
वहाँ नितीश कुमार, यहाँ तेरी हिरणी सी चाल हैं
वहाँ लिट्टी, घी, अँचार, यहाँ तेरे सोलह श्रृंगार हैं
वो सब मेरे ह्रदय में और तू भी विराज है.
कौन कहेगा तुझे वेवफा
तेरे संग एक रात पे ता उम्र निसार है.
मिश्री की कोई डाली हो तुम
या चासनी में ताली हो तुम.
तुम्हारे वक्ष जैसे पहली की क्यारी हो तुम
तुम्हारे कमर जैसे मेरे खेतों में गेहूं की बाली हो तुम.
जो भी हो जैसी भी हो पर प्यारी हो तुम
देखो, चुनना साथी कोई बिहारी को तुम.
नैनों से कातिल, और कमर से कंटीली हो तुम
नागिन कोई नवेली हो तुम.
पर देखो, चुनना सपेरा कोई बिहारी को तुम.
RSD
गजब कमसिन-कली हो तुम
जवानी में ऐसी ढली हो तुम
चांदनी वर्फीली हो तुम
मोहिनी मनचली हो तुम
झंकृत जिससे ह्रदय मेरा
रागनी कोई नई हो तुम
डंस रही हो जान-मानस को
नागिन कोई नवेली हो तुम.
कैसे आँखे फेर ले हम
जब लगती मन को भली हो तुम.
नाजुक छुई-मुई सी हो तुम
शाम गोधूलि हो तुम
RSD
दर्द की रात ये ढलती नहीं,
पीता हूँ मगर ये चढ़ती नहीं।
कोई तो हो जो जिक्र छेड़ दे उनका जरा
इस ठंढ में आँसू पिघलती नहीं।
मिला जो मोहब्बत तो तू खुशनसीब है
वार्ना फिर मयखाना ही नसीब है.
उम्रभर की ख्वाइशें रख दी समेटकर तेरे जिस्म पर
वो एक जिस्म भी ना मिला तो ये कैसा नसीब है?
वक्त के थपेड़ों ने यूँ रख दिया उलझाकर
कोई भी एरा-गैर कह रहा की यही नसीब है.
बैठ जाएँ हारकर, हम ऐसे भी नहीं
बिहारियों ने अपने हाथों से लिखी नसीब है.
गंगा बाह रही है धरती पे, जाने किसके लिए
गंगा बाह रही हैं बिहार से, ये हमारा नसीब है.
कैसे कह दूँ की उनसे मुलाकात नहीं होती है?
जिस्म दूर है, पर बात रोज होती है.
आँखे मेरी आंसूं उनके, जिस्म मेरा सासें उनकी
मोहब्बत की रातें कुछ यूँ भी होती हैं.
ललुआ – भइल, भलुआ -भइल
फिर भी लागेलूं कमाल के
आवा ना रानी, बैठा ना रानी
बोरसी तपाल जाए आज साथ में
शरम करी, राम-नाम जपीं
अब छोड़ दिन इ-सब काम के
छापरहैया हैं
माज़ा मारेम जीवन के आखरी सांस ले
दामाद मिलल, बहू उतरल
फिर भी लागेलु सलोह साल के
आवा ना रानी, बैठा ना रानी
खा ल सतुआ आज साथ में.
शरम करी, राम-नाम जपीं
अब छोड़ दिन इ-सब काम के
छापरहैया हैं
माज़ा मारेम जीवन के आखरी सांझ ले.
RSD
My sweetheart use shampoo on the boobs and its really helps us to ignite the night..
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चोर ले गइल चोली खोलके
रह गईनी हम ओठ दाब के
राजा, तहरे इजतिया के ख्याल रहल हो
ना त जार देतीं मुआना के बोरसी के अगिया से.
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तेरी मोहब्बत में सिर्फ हम ही तन्हा नहीं हैं
जिसने भी देखा है तुम्हे, फिर चैन से बैठा नहीं है.
ए चाँद, तू सिर्फ चाँद नहीं है,
तू मंजिल है, जलन है, आग है, द्वेष है, इंतिजार है, इन तारों का.
तुम्हारा जिस्म, सिर्फ एक जिस्म नहीं है,
ये प्यास है, मयखाना है, अरे जाम हैं हम दीवानों का.
ये शाम, सिर्फ एक शाम नहीं है,
ये दर्द है, आंसू हैं, यादें हैं तेरी बाहों का.
ये बिहार, सिर्फ एक प्रदेश नहीं हैं,
ये नाम है राजेंद्र प्रासाद, जयप्रकाश, महामाया प्रसाद,
अरे नाम है भारत के मस्तक के सितारों का.
हमें याद है तेरी जुल्फों के साराएँ रातों का काट जाना
अब भी ये रातें तेरी यादों से ही कटती हैं.
RSD
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
तन से गंदे, पेट के भूखे, बिन पहने, कपडे
फिर से करेंगे तुम गोरों की चाकरी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
फिर जय-जय कारा, होगा तुम्हारा
तो क्यों खाई सालों तक सीने पे गोली
फीकी हैं तुम्हारे सौंदर्य के आगे हमारे शहीदों की कुर्बानी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी।
RSD