मेरा लहू कब इश्क़ बन गया?


इरादा मुझसे पूछता है जहाँ,
जिसे पता ही नहीं मेरा लहू कब इश्क़ बन गया?
अब किसकी खता कहूं इसे?
तेरी नजरों को ज़माने की शोहरत,
और मेरी नज़रों को तेरी नजर का तीर मार गया.

 

परमीत सिंह धुरंधर

चेहरा


नज़ारे कितने गुजर गए इन आँखों के सामने से,
जो ना गुजरा वो अब तक तेरा चेहरा है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

तकिए पे कब तक करवट लोगी?


जिन्दा रहने के लिए,
एक मुलाकात जरुरी है सनम.
जरुरी है सनम.
तेरी इस झुकी नजर के लिए,
मेरा पास आना जरुरी है सनम.
जरुरी है सनम.
जब बिखरती हैं जुल्फें, तेरे चेहरे पे,
बढ़ जाती हैं तेरी साँसे।
इन साँसों की मंजिल के लिए,
मेरी साँसों का उठाना जरुरी है सनम.
जरुरी है सनम.
तकिए पे कब तक करवट लोगी?
मीठी नींद के लिए,
एक चुम्बन जरुरी है सनम.
जरुरी है सनम.

 

परमीत सिंह धुरंधर

ख्वाब


सैकड़ों हैं संसार में,
जो तुमपे निसार हो जाएँ।
हम तो बस आपका,
दीदारे-ख्वाब रखते हैं.
आपकी खूबसूरती का ऐसा,
आयाम है.
की हर रात पलकों में,
तुम्हारा ख्वाब रखते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न


खूबसूरत जाल फैलाने पर,
फंसता हर मर्द है.
मगर चाँद सिक्के उछल कर देखो,
फिर हुस्न कैसे बदलता रंग है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

वो इतने करीब से निकल गई


वो इतने करीब से निकल गई,
अंजान बनके।
मोहब्बत थी, बरना चुनर उड़ा लेते,
हैवान बनके।
अब इशारों -इशारों में रह गई जिंदगी,
सुखी, उदास, गुलाब की पंखुड़ियों सी,
किताबों में बंध के.

 

परमीत सिंह धुरंधर

तुम करवट भी लोगी


तुम्हे इतने प्यार से रखूँगा समेट के,
की तुम करवट भी लोगी तो, मेरे बाहों में.
मेरी ओठों से तुम्हारी ओठों का न होगा फासला,
तुम साँसे भी लोगों तो मेरी साँसों से.

 

परमीत सिंह धुरंधर

काले हम हो गए


जमाना आज भी कहता है,
की वो खूबसूरत बहुत हैं.
किसी को क्या पता?
उनके काजल से काले,
हम हो गए.

 

परमीत सिंह धुरंधर

दिया वो ही बुझाते हैं


दिया वो ही बुझाते हैं,
जो शर्म का ढिढोंरा पीटते हैं.
जहाँ जमाना चुप हो जाता है,
हम वहाँ अपनी आवाज उठाते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

जवानी उनपे चढ़ी


अर्ज किया है दोस्तों,
की जवानी उनपे चढ़ी,
और बर्बाद हम हो गए.
लुटा हमें उसने जी भरकर,
और जमाने भरके,
गुनाहगार हम हो गए.

 

परमीत सिंह धुरंधर