उषा और पंक्षी


पंक्षी कलरव करते हैं
पंक्षी अभिनय करते हैं
ए उषा देख तेरे इंतज़ार में
पक्षी कैसे मौन धारण रखते हैं?

सूरज की प्रथम किरण पर
चहचहा उठते है ये
अचानक दुनिया भर की खुशियाँ
उमंगें प्राप्त कर,
नयी जवानी में नृत्य करते हैं.

और बिना किसी पल देरी के
तेरे स्वागत में,
क्षितिज की ओर,
नीले आसमान में
पंख कोलकर उड़ान भरते हैं.

पंक्षी कलरव करते हैं
पंक्षी अभिनय करते हैं
ए उषा देख तेरे इंतज़ार में
पक्षी कैसे मौन धारण रखते हैं?

परमीत सिंह धुरंधर

शहर में


हमसे क्या पूछते हो पता शहर में?
हमें खुद नहीं पता की है हम किस शहर में.

बस जुबान छोड़ के मेरा
बाकी सब कुछ बदल दिया इस शहर ने.

भटकते रहते हैं जाने किसकी खोज में
ये भी नहीं पता की आये थे कहाँ से इस शहर में?

परमीत सिंह धुरंधर

बिना T-shirt के आज


You are my heart baby
You are my heart
हौले – हौले खेलेंगें बिना T-shirt के आज.

मम्मी को झूठ बोल दे
और बंक कर दे सारी क्लास
पूरा दिन गुजारेंगे आज एक साथ.

You are my heart baby
You are my heart
हौले – हौले खेलेंगें बिना टीशर्ट के आज.

परमीत सिंह धुरंधर

छुट्टियों में स्कूल आने का बहाना दे गए वो


दर्द से भरी है जिंदगी
और कुछ नहीं पर हौसला दे गए वो.

ये शहर ही है ऐसा की हर कोई है अकेला
पर किताबों में छुपाकर पता दे गए वो.

उम्र ही ऐसी, क्या वादा और क्या इरादा?
पर छुट्टियों में स्कूल आने का बहाना दे गए वो.

ये शहर ही है ऐसा की हर कोई है अकेला
पर किताबों में छुपाकर पता दे गए वो.

परमीत सिंह धुरंधर

कब मानव बाँध पाया है सागर दुबारा?


गुजरा हुआ ज़माना हमें बुलाता ही रहा
बढ़ चले जो हम तो मुश्किल था लौटना हमारा।
अडिग रहे तो तट पे तो
सागर को भी छोड़ना पड़ा पथ हमारा।

और जब भी लिखा जाएगा इतिहास
हमेसा श्रीराम ही गलत होंगें इतिहासकारों की नजर में
मगर कब मानव फिर बाँध पाया है सागर दुबारा?

परमीत सिंह धुरंधर

अब तो उतरो महादेव


पल – पल में अधूरापन
पल – पल में निराशा है.
अब तो महादेव आपका
ही बस सहारा है.

समस्त ब्रह्माण्ड को जितने वाले
रघुकुल पे भी दुर्भाग्य का साया है.
अब तो उतरो महादेव
भगीरथ ने पुकारा है.

प्रचंड गंगा के समक्ष
विष्णु, ब्रह्मा, समस्त जग हारा है.
अब तो महादेव आपका
ही बस सहारा है.

अब तो महादेव आपका
ही बस सहारा है.
अब तो उतरो महादेव
भगीरथ ने पुकारा है.

परमीत सिंह धुरंधर

शायद मुझमें चालाकी न थी


हौसलों की कमी न थी
पर शायद मुझमें चालाकी न थी.
मेरी किश्ती डूबी उन किनारों पे
जहाँ लहरों की ख्वाइस भी ऐसी न थी.

परमीत सिंह धुरंधर

पिछड़ा – पिछड़ा महसूस करता हूँ


बुलंदियों की चाहत में ऐसे भाग रहे है लोग आगे – आगे
की मैं दिल के हाथों मजबूर, पिछड़ा – पिछड़ा महसूस करता हूँ.
ऐसे तोड़ गयी वो दिल मेरा मोहब्बत में
की खुशियों की हर बेला में तन्हा – तन्हा महसूस करता हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

29 Nov


इस शहर के हर मोड़ पे अकेला – अकेला सा महसूस करता हूँ
घर किसी का भी टूटे, मैं टुटा – टुटा सा महसूस करता हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

मराठी-मुलगी और बिहारी लट्टू


कुटे-कुटे चली रानी
कुटे-कुटे तू
सांग ज़रा नैनों से
कब करेगी गुटर-गू.

बरसने लगे हैं बादल
उठने लगी है मिटटी से खुसबू।
गूंजने लगे हैं भोंरे
और चमकने लगे हैं जुगनू।
सांग ज़रा नैनों से
कब करेगी गुटर-गू.

तू बसंत सी खिली – खिली
मैं निशाचर उल्लू।
तू मराठी-मुलगी
और मैं बिहारी लट्टू।
सांग ज़रा नैनों से
कब करेगी गुटर-गू.

परमीत सिंह धुरंधर