खूबसूरत लड़कियां : मगरमच्छ के आंसू से बन्दर फंसाती है


खूबसूरत लड़कियां एक जाल बिछाती हैं,
मगरमच्छ के आंसू से बन्दर फंसाती है.
पुरुष-प्रधान समाज से इनको है शिकायत,
मगर अपने डैड को परफेक्ट मैन बताती हैं.
नारी के अधिकार पे स्वतंत्र विचार रखने वाली,
ये अपने भाई के प्रेमिका को चुड़ैल बताती हैं.
इन्हे पसंद हैं रहना खुले आसमान के तले,
घोंसलों को बनाना इनके अरमान नहीं,
मगर तीस तक पहुँचते – पहुँचते,
ये शादी – शादी और सिर्फ शादी चिल्लाती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

Perfection


If she can not sense the smell, she is not perfect. And, if she has a good sense of smell, she can not be characterful and trustworthy.

Parmit Singh Dhurandhar

जब तक गुनाह नहीं होगा


जब तक गुनाह नहीं होगा,
कोई तुम्हारा अपना रिस्तेदार नहीं बनेगा।
ये वक्त ही ऐसा है दोस्तों,
जिन आँखों के लिए जी रहे हो,
वक्त आने पे,
वो भी तुम्हारा पहरेदार नहीं बनेगा।
जिस्म की भूख तो गौरेया को भी होती है,
पर शर्म की देवियों से नीचे,
कोई परिंदा भी नहीं गिरेगा।

परमीत सिंह धुरंधर

पर आज भी हम भिखारी हैं


उनकी कलम क्या लिखेगी, जो महलों के पुजारी हैं,
हमने तो बाँधा है लहरो को, पर आज भी हम भिखारी हैं.
उनकी नजरें क्या चाहेंगी, जो बस सत्ता से चिपकती हैं,
चाहत तो की बस हमने, की आज तक तन्हाई है.
क्या कहे उनपे जिनकी हर बात पे शर्म ही दुहाई है,
अजी, देखा है हमने, हर रात उनकी बजती नयी शहनाई है.

परमीत सिंह धुरंधर

तो मेरा बोलना तो बनता है


तेरा मुस्कुराना बनता है,
तो मेरा भी मुस्कुराना बनता है.
जब भी चर्चा होगी हुस्न (उनपे) पे,
तो मेरा बोलना तो बनता है.
इस कदर लूटें हैं तेरी मोहब्बत में,
की तुझे बेवफा कहना तो बनता है.
उनको एक ही गम है,
की हम अब भी जिन्दा हैं शहर में.
तो दुप्पटे में उनका,
यूँ मुखड़ा छुपाना तो बनता है.

This is dedicated to Indian actor Raajkumar for his famous dialogues.

परमीत सिंह धुरंधर

Shambhavi:A promise impeccable


A promise impeccable
By me to you
A promise to be by your side true
A promise to be together by life’s
thick and thin,
A promise to love till the life’s brim,
A promise to walk hand in hand,
A promise to be honest in tiniest
strand,
A promise to be there
In your hardest times,
A promise to share your lovliest
rhymes,
A promise from dawning tday till
Tomorrow,
A promise to be here even if you
go,
A promise impeccable from me to
you

Written by the sweetest person in this world for me. Its a memory I will always cherish.

Parmit Singh Dhurandhar

कभी – कभी मेरे ह्रदय में बेदना उठती है


कभी – कभी मेरे ह्रदय में बेदना उठती है,
मैं सीमा का प्रहरी और तू आँगन की एक कलि है.
मैं अपने स्वार्थ वस बंधा हूँ तुझसे,
तू निस्वार्थ मन से मेरे संग कष्ट उठाती है.
कभी – कभी मेरे ह्रदय में बेदना उठती है.
तुमने काटी हस कर बरसों एक ही साड़ी में,
और लाने को नयी पोशाकें मेरे लिए,
होली में, मेरी हाथों को पैसे थमाती है.
मैं नहीं दे पाया तुम्हे कभी भो कोई खुशियाँ,
मगर तू जिन्दी के इस साँझ पे भी,
मेरी हर खुसी पे मुस्काती है.
कभी – कभी मेरे ह्रदय में बेदना उठती है,

परमीत सिंह धुरंधर

खेल


ये इश्क़ – मोहब्ब्बत क्या है,
बस दो जिस्म का खेल.
हम खेले तो धोखा,
और वो खेले तो प्रेम।
वो छोड़े,
तो हम में ही कुछ कमी है,
और हम छोड़ दें,
तो हमें नहीं है उनकी क़द्र।

परमीत सिंह धुरंधर

विश्वामित्र और मेनका


मुझे कोई उपेक्षा नहीं,
की तुम सीता – सावित्री बन के रहो,
मगर ये भी तो कहो,
जब कह ही रही हो खुद ही,
की अब तक कितनो को,
सीता – सावित्री बनके छला है.
मैं उन पंडितों में नहीं जिन्हे बस,
विश्वामित्र का दम्भ ही दिखा है,
मैं वो पंडित हूँ,
जिसकी कलम ने हमेसा,
मेनका को बस चरितहीन ही लिखा है.
भूख से बिलखते बच्चे को जिसने छोड़ा,
बस इंद्रा और सवर्ग के चाह में,
लिखते रहे सब उसको बस नारी की विवसता,
मैंने उसको बस व्याभिचार ही लिखा है.

परमीत सिंह धुरंधर

आँखें


बदल दे जो खून को वो रिस्ता गुनाहों पे चलने को मजबूत करता है,
ये उनकी आँखें हैं दोस्तों जो मुझे हर गुनाह करने को मजबूर करता है.

परमीत सिंह धुरंधर