मोहब्बत


मोहब्बत में पगला के हम भी,
बुरका पहनने लगे हैं.
वो तो दिखती नहीं हैं,
और हम भी खुद ही सवारने लगे हैं.
शर्मो-हया की अपनी दे के दुहाई,
वो बैठी है घर की दीवारों में,
और हम भी उनके छत पे,
अपनी पतंगें भिड़ाने लगे हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

जूनून


कुछ तो किस्मतों का साया है,
मोहब्बत में जिंदगी बस, जाया है.
सरहदों पे मिटने वालों की,
कब हुईं हैं ये जागीरें,
इश्क़ में रह जाती हैं,
बिना छत के ही घर की दीवारें.
फिर भी ये जूनून है,
हमारे जिस्म का,
साँसों के रुकने तक,
लगी रहती हैं हमारी उम्मीदें.

परमीत सिंह धुरंधर

गुनाहों के साये


कई रिश्ते मेरे,
आज भी गुनाहों के साये में हैं.
और कई रिश्तों के लिए मैं,
आज भी गुनाहें कर जाऊँगा.
वो मेरी न बन सकी,
ये किस्मत नहीं,
उनकी मर्जी है,
वो अगर आज मुस्करा दें,
तो उनको अपना बनाने के लिए
आज भी क़यामत मचा जाऊंगा.

परमीत सिंह धुरंधर

मैराडोना मैं, मेडोना तू


रूप-रंग में सोना तू,
अंग-अंग से टोना तू,
आज तो घूँघट खोल दे रानी,
मैराडोना मैं, मेडोना तू.
मैराडोना मैं, मेडोना तू.
मैराडोना मैं, मेडोना तू.
आज की रात लम्बी है,
तन-मन पे छाई मस्ती है.
बस अपने ओठों से पिला दे तू,
क्रिस्टिनो मैं, बिपाशा तू.
क्रिस्टिनो मैं, बिपाशा तू.
क्रिस्टिनो मैं, बिपाशा तू.

परमीत सिंह धुरंधर

This is dedicated to my favorite player Meradona and his love for the game.

मधुर नहीं है प्रेम कोई


मधुर नहीं है प्रेम कोई,
न मधुर ही है कोई ख़्वाब हाँ.
कहीं डूब रहा है सूरज रोज,
कहीं घट रहा है रूप चाँद का.
कहीं पुष्प को इंतज़ार है,
किसी भ्रमर के चुम्बन का.
कहीं भ्रमर भी है कैद में,
हो आसक्त इस पराग का.
जलने को अब क्या रखा है,
महबूब तेरी यादों के सिवा.
तेरे योवन पे टूटे दर्पण कई,
मेरे योवन को न मिला कोई तुझ सा.

परमीत सिंह धुरंधर

Love is not sweet…Crassa

नैहर के चोर


गली – गली में शोर बालम जी,
धरती पे एगो चोर बा.
लूट अ ता रोज हमर खजाना,
अइसन उ मुँहजोर बा.
हमरा रहते ये रानी,
केकर तहरा पे जोर बा.
हमरा त लॉग अ ता,
की तहरे मन में कउनौ चोर बा.
चल जा तानी रोजे बथानी,
हमरा के अकेले छोड़ के.
आव अ ता आधी रात के,
दे ता देहिया झकझोड़ हाँ.
गली – गली में शोर बालम जी,
धरती पे एगो चोर बा.
लूट अ ता रोज हमर खजाना,
अइसन उ मुँहजोर बा.
काहे ना चिल्लाइलु तू,
आवाज देहलू बढ़ के.
हमरा त लॉग अ ता रानी,
तहरा भाइल ई चोर बा.
मुँहवा दबले रहल हमार,
अंगिया पे रखले रहल धार हाँ.
चूड़ी तुरलख, कंगन छिनलख,
ले गइल नथुनिया तोड़ हाँ.
गली – गली में शोर बालम जी,
धरती पे एगो चोर बा.
लूट अ ता रोज हमर खजाना,
अइसन उ मुँहजोर बा.
हमरा त लॉग अ ता रानी,
तहरा नैहर के कउनौ जोड़ हाँ.
गली – गली में शोर बालम जी,
धरती पे एगो चोर बा.
लूट अ ता रोज हमर खजाना,
अइसन उ मुँहजोर बा.
हमरा रहते ये रानी,
केकर तहरा पे जोर बा.
हमरा त लॉग अ ता,
की तहरे मन में कउनौ चोर बा.

परमीत सिंह धुरंधर

तेरा दिल टूटे ना


हर रिश्ता,
छूटे तो छूटे।
तेरा संग छूटे ना.
हर बंधन,
टूटे तो टूटे,
तेरा दिल टूटे ना.
पथ चाहे पथरीली हो,
या फूलों से सजी.
तेरे क़दमों पे,
मेरे जीते जी,
कोई जख्म आये ना.

परमीत सिंह धुरंधर

ये प्रेम निभा दो


तुम अपनी पलकों से,
मेरी यादों का,
हर सफर मिटा दो.
मुझे तन्हा – तन्हा करके,
मेरा संसार,
अपनी बाहों में बसा दो.
हर सुबह छलके,
तुम्हारा योवन मुझपे।
हर रात,
अपने ओठों का,
मुझे जाम पिला दो.
छोड़ के अपनी हर,
शर्म – हया को.
इन सर्द भरी रातों में,
मेरे तन पे,
अपना आँचल ओढ़ा दो.
क्या मज़बूरी,
क्या रस्मो को निभाना।
हर रिस्ता भुला के,
जीवन भर का,
ये प्रेम निभा दो.
तुम बनके मेरी शाम्भवी,
ये जीवन मेरा,
सम्पूर्ण बना दो.
तुम अपनी पलकों से,
मेरी यादों का,
हर सफर मिटा दो.
मुझे तन्हा – तन्हा करके,
मेरा संसार,
अपनी बाहों में बसा दो.

परमीत सिंह धुरंधर

एक दीप ही संग जला ले


मेरे प्यासे मन को,
तू अपने अंग लगा ले.
कुछ नहीं तो एक रात,
एक दीप ही संग जला ले.
मैं बैठा रहूँ,
उलझ के तेरी आँखों से.
तू मेरे सीने पे,
अपनी ये जुल्फ बिखरा ले.
तू खनका ये कंगन,
तू छनका ये पायल।
सारी रात, सारे जीवन,
बस मेरी धड़कन से तू ताल मिला के.
मुझे रख तू भूखा, प्यासा,
मेरे तन को भी बाँध के.
मगर अपने अधरों से प्रिये,
दो-दो बून्द चटा के.

परमीत सिंह धुरंधर

काजल


गम में डूबी मेरी रातों को,
तेरी आँखों का काजल बन जाने दे.
कुछ नहीं मेरे महबूब,
तो अब अपनी आगोस में मुझे पनाह लेने दे.
जब से देखा है तुझे इन आँखों ने,
अब इन्हे किसी मंजिल की चाह नहीं।
मिटने का गम हम राजपूतों को नहीं,
मगर मुझे मिटा दे तू,
मेरे सीने पे ऐसा खंजर उतर जाने दे.
तेरे ओठों की लालसा,
अब जिंदगी से ज्यादा है.
विष ही सही,
पर, अब इन्हे मुझे चख लेने दे.

परमीत सिंह धुरंधर