जख्मों को सीना नहीं आया, जाम को पीना नहीं आया,
हम तो देखते रह गए हुस्न उनका, घूघंट को उठाना नहीं आया.
वो झल्लाकर, चली गयीं एक नयी राह अपनी बनाकर,
हमको मोहब्बत में आज भी, भूलना नहीं आया.
परमीत सिंह धुरंधर
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जख्मों को सीना नहीं आया, जाम को पीना नहीं आया,
हम तो देखते रह गए हुस्न उनका, घूघंट को उठाना नहीं आया.
वो झल्लाकर, चली गयीं एक नयी राह अपनी बनाकर,
हमको मोहब्बत में आज भी, भूलना नहीं आया.
परमीत सिंह धुरंधर
भूल हुई है तो सुधारो,
ना सुधरे तो भूल जावो वो भूल नहीं होती।
मोहब्बत कभी पाक नहीं होती,
आइना उत्तर के देखो,
सच्चाई कभी सफ़ेद नहीं होती।
मशगूल हो गए हो जिन बाहों में जाकर,
रात ढलने दो फिर देखो,
माशूमियात कभी इतनी खामोस नहीं होती।
उलाहने मिलते रहेंगे यूँ हैं हर कदम पे,
हुस्न बिना जिरह के कभी शांत नहीं होती।
परमीत सिंह धुरंधर
आँखे, होठ और आगोस किसकी चाहत नहीं,
दुनिया में सबसे बड़ी भीड़ ये ही.
परमीत सिंह धुरंधर
प्यार उनसे मत कर जो तुझे दुनिया में अकेला कर दें,
प्यार उनसे कर जो अकेले हों दुनिया में तेरे बिना।
परमीत सिंह धुरंधर
रातों का समंदर हम कभी तैरें ही नहीं,
और दिन में कभी वो मेरे साथ आयीं ही नहीं।
परमीत सिंह धुरंधर
जिंदगी दो पलों की, बेवफाई उम्र भर का,
रिश्ते यूँ ही नहीं बनते, लहू हो या दिलों का.
परमीत सिंह धुरंधर
कौन कहता है की मैं, मैं नहीं रहा,
सब कहते है अब तू मेरा नहीं रहा.
प्यार में जितने भी वादे हुए,
सब मेरे पास रह गए.
एक भी ऐसा नहीं था की,
तेरे इरादे नहीं हुए.
परमीत सिंह धुरंधर
पतंग जो टूट जाए धागे से,
लौट के फिर उन हाथों से नहीं उड़ता.
ये सच है,
मैं आज भी दीवाना हूँ तेरे हुस्न का,
पर तेरे लौटने की दुआ मैं अब नहीं करता.
परमीत सिंह धुरंधर
चाँद मिल जाए तो फिर,
ताउम्र काट जाए चांदनी में.
पर मेरी मान,
रोज नया दिया जलाने में भी नशा है.
परमीत सिंह धुरंधर
यादों की आह,
है मोहब्बत।
कभी देखा है क्या,
पतंगे को साथ रहते हुए.
मोहब्बत में मिटना,
ही है मुक्क़दर।
कभी देखा है क्या,
पतंगे को फिर किस्मत आजमाते हुए.
परमीत सिंह धुरंधर