दिल जब भी शिकार पे निकला
शिकार हो गया.
उसने ऐसे नजर ही रखी
दिल लाचार हो गया.
परमीत सिंह धुरंधर
दिल जब भी शिकार पे निकला
शिकार हो गया.
उसने ऐसे नजर ही रखी
दिल लाचार हो गया.
परमीत सिंह धुरंधर
वक्त के बदलने से इंसान बदल सकता है
पर कर्म के बदलने से भगवान बदल सकता है.
परमीत सिंह धुरंधर
राम जी ने भी लक्ष्मण से कहा था, “मिट्टी में लोटना ज्यादा आनंददायक और मीठा है, वनिस्पत रण में दुश्मन को बांधना।”
परमीत सिंह धुरंधर
मंडप से दुल्हन के भाग जाने पे कैसा लगता है? आज विराट कोहली को वैसा ही लग रहा है.
परमीत सिंह धुरंधर
ए औरत, तू भी क्या चीज़ है?
तुझे बेवफा बना के, खुद बीमार है खुदा।
परमीत सिंह धुरंधर
क्या किस्मत पाई है तुमने भी Crassa?
तुम सा शहर में कोई दूसरा नहीं मिलता।
कितना भी काम आ जाए हम किसी के
अब वो तारीफों का शब्द नहीं मिलता।
परमीत सिंह धुरंधर
तन्हा रहा सफर ए मंजिल तेरी चाहत में
तू मिली भी तो एक तन्हाई है तेरे इस आँगन में.
परमीत सिंह धुरंधर
Darkness is epistatic to the age on the bed.
Parmit Kumar Singh
उस ने फिर मेरा हाल पुछा है कितना मुश्किल सवाल पुछा है.
परमीत सिंह धुरंधर
जहर और औरत, जहर ज्यादा विश्वशनीय और संस्कारी है.
परमीत सिंह धुरंधर