हसरते जिन्दगी


कभी जाम बन कर ओठों का, कभी ख्वाब बनकर आँखों का,

हसरते जिन्दगी ने हर पल में छला है,
जब घूँघट उठाया उनका अपनी चार दिवारी  में, परमित
रंगे-हुस्न ने हकीकत दिखलाया है,

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