घर दुआर छोड़ के,
हो गईलन सन्यासी,
फ़लेनवा के नाती हो,
फ़लेनवा के नाती।
सुनलेरनी उनकर,
भीरल रहल टंका,
तहरे से रानी हो,
तहरे से रानी।
बड़ों-बड़ों के बीच में,
करस तहार बखान हों,
देखअ उनकर बिकअता,
खेत आ खलिआन हों।
दबी जुबान में हर कोई कहे,
की उनकर,
भीरल रहल टंका,
तहरे से रानी हो,
तहरे से रानी।
छीन के आपने,
मेहरारून के पैजनियाँ,
बाँध देहलन तहके,
बनइलन दुल्हनियां।
की ओइसन,
राज कुमार से,
एगो सुकुमार से,
तुहुँ मंगवैलू,
भीख के दाना हो।
सुनलेरनी उनकर,
भीरल रहल टंका,
तहरे से रानी हो,
तहरे से रानी।
कतना लिखान भइल,
कतना पुराण भइल,
कोई न समझल,
ई त्रिया-चरित्र हो।
की कहतारन बाबू,
ईह परमीत सिंह,
की हम न करेम,
तहसे रानी ई प्रीत हो।
सुनलेरनी ताहर,
भीरल रहल टंका,
उनकरे से रानी हो,
उनकरे से रानी।