पिया निर्मोहिया


पिया निर्मोहिया ना समझे ला दिल के
कैसे समझाईं सखी अपना ई दिल के?
दिन भर बैठकी मारेला छपरा में
दहकत बा देहिया हमार सेजिया पे.

परमीत सिंह धुरंधर 

छपरा के जलेबी-2


अरे झूठे कहेला लोग इनके निर्मोही
पिया बारन धुरंधर इह खेल के.
बिना उठईले घूँघट हमार
अंग -अंग चुम लेहलन अपना बात से.

परमीत सिंह धुरंधर 

चोली रंगाई ए गोरी


बाँध अ मत ऐसे जोबना ए गोरी
हाहाकार मच गइल बा देख तहार ढोंढ़ी।
आइल बारन छपरा के धुरंधर मैदान में
त आज तहार चोलिया रंगाई ए गोरी।

आरा – बलिया से बच गइलू
मगर आ गइलू नजरिया में
माहिर छपरा के धुरंधर के
त आज छपरा में नकिया छेदाइ ए गोरी।

अभी बाली बा उमर, येही पर त चढ़ी रंग
जतना उड़ेल बारू, उड़ ला
दाना जी भर के चुग ला
त आज पंखिया तहार कटाई ये गोरी।

परमीत सिंह धुरंधर 

जोगीरा सारा रारा


सैयां काट -काट के खाये गाल रे
जैसे मालपुआ ह इ बंगाल के.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

ऐसे तो दांत न थे किसी यार के
सखी, एहीसे मीठा लागे भतार रे.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

कभी भाई- कभी बेटा, कभी बीबी – कभी पतोह
बुढ़ापे में मुलायम की सब लगते हैं क्लास रे.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

दिल्ली में ताल थोक के मनोज तिवारी है तैयार
अबकी बार, दिल्ली में बिहार -२.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

कमलनाथ के हाथ में जैकलीन की कमर
युवा राहुल बाबा पे कोई ना डाले नजर.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

बॉलीवुड में है एक मैना, बोले खरी – खरी बात
नाम है कंगना, हारे जिससे रितिक, कारन – सैफ अली खान.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।

परमीत सिंह धुरंधर 

खर्चा उठा ली


सारी नगरिया में चर्चा बा रउरे आमदनी के
सुनी ए बाबूसाहेब छपरा के धुरंधर
खर्चा उठा ली हमर जवनिया के.

हमरा खूंटा से कउनो गाय ना तुराईल आज तक
फंस जइबू रानी, रहे के पड़ी
साड़ी उम्र फिर संगे कोठारिया में.

परमीत सिंह धुरंधर

उसी के संग अब बिछाऊँ गी खटिया


पतली कमर पे जवानी का नशा
ढूंढ रहीं हूँ गली – गली में पिया।
सूना है कोई है छपरा का धुरंधर
सखी
उसी के संग अब बिछाऊँ गी खटिया।

कैसे पड़ गयी तू उसके हथकंडे?
निर्दयी, निर्मोही, वो तो है शातिर बड़ा.
तू जल रही है शायद
आफताब ने कहा की वो है भोला बड़ा.
कैसे पड़ गयी तू इन दोनों के हथकंडे?
दोनों की यारी, है दांत-कटी यहाँ।

परमीत सिंह धुरंधर

चारपाई भी चूल्हा के आग लागे ला


जब – जब कोयलिया कुहके बाग़ में
मन में हुक उठे ला.

दू गो हमार नैना राजा जी
विरह में पोखर पे सांझ ढले ला.

छोड़ दी शहर के कमाई
चारपाई भी चूल्हा के आग लागे ला.

परमीत सिंह धुरंधर

दू ए गो नथुनिया


दू ए गो नथुनिया में लूट अ तारअ राजा
रात में चैन आ दिन में मजा.

कइला बदनाम, भइल सारा जिला में हल्ला
बाली उमर में ही दे दिहलअ साजा।

छुप के – छुपा के आवतानी तहरा से मिले
ओपर तू रखअतार किवाड़ खुला।

 

परमीत सिंह धुरंधर