दीवानगी


किसी और की नाराज़गी से,
इंसान बंदगी तो नहीं छोड़ सकता।
मोहब्बत पे मर मिटने वाला,
आशिकी तो नहीं छोड़ सकता।
वो और हैं जिससे मोहब्बत पसंद ना होगी,
उनसे सहम कर धुरंधर सिंह,
अपनी दीवानगी तो नहीं छोड़ सकता।

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