दुश्मन


सजा देते, देते
दुआ दे गए.
दुश्मन मेरे,
मुझको गले से लगा के.
जिसके लिए,
दुनिया छोड़ी।
वो ही खंजर चुभा गए,
मुझको गले से लगा के.

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a comment