सीवान जाना छोड़ दूँ,
छपरा में बैठना छोड़ दूँ,
मलमलिया, रुकना छोड़ दूँ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये।
खेत में सोना छोड़ दूँ,
भैंसों को चराना छोड़ दूँ,
पोखर में नहाना छोड़ दूँ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये।
बीज डालना छोड़ दूँ,
फसल पटाना छोड़ दूँ,
नहर बांधना छोड़ दूँ ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये।
खेत-खलिहान छोड़ दूँ,
दोस्त-ज्वार छोड़ दूँ,
साली -सरहज छोड़ दूँ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये।
ताश खेलना छोड़ दूँ,
बाजी लगाना छोड़ दूँ,
भौजी के घर जाना छोड़ दूँ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये।
होली की मस्ती छोड़ दूँ,
गावं की गोरी, छोड़ दूँ,
नयन-मटक्का छोड़ दूँ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये।
परमीत सिंह धुरंधर