रोटी पकाना छोड़ दूँ,
चूल्हा जलाना छोड़ दूँ,
आँगन बहारना छोड़ दूँ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये.
सास की सुनना छोड़ दूँ,
देवर का मानना छोड़ दूँ,
ननद संग खेलना छोड़ दूँ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये.
गोबर निकालना छोड़ दूँ,
चिपरी पाथना छोड़ दूँ,
लेगी लगाना छोड़ दूँ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये.
सुबह में उठना छोड़ दूँ,
साज-सवारना छोड़ दूँ,
पास तेरे आना छोड़ दूँ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये.
पास-पड़ोस छोड़ दूँ,
चौकी-चूल्हा छोड़ दूँ,
घर-आँगन छोड़ दूँ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये.
दीप जलाना छोड़ दूँ,
पूजा-पाठ छोड़ दूँ,
सखी-सहेली छोड़ दूँ,
तू बोल सोनिये, तू बोल सोनिये.
परमीत सिंह धुरंधर