शाम होते ही उनकी तलब होती है,
मोहब्बत जिंदगी बदल देती है.
रहम की भीख क्यों और किस से मांगे,
मेरी आंसूओं पे ही वो मुस्करा देती है.
परमीत सिंह धुरंधर
शाम होते ही उनकी तलब होती है,
मोहब्बत जिंदगी बदल देती है.
रहम की भीख क्यों और किस से मांगे,
मेरी आंसूओं पे ही वो मुस्करा देती है.
परमीत सिंह धुरंधर