मेरे सीने पे, उनकी अधरों का चुम्बन,
अब कोई तीर भी चलाये, तो क्या गम है.
एक बार तैर गए ये दरिया,
अब डूब भी जाएँ, तो क्या गम है.
मौत तो आएगी, अगर जिंदगी है,
मौत ही अगर जिंदगी हो, तो क्या गम है.
परमीत सिंह धुरंधर
मेरे सीने पे, उनकी अधरों का चुम्बन,
अब कोई तीर भी चलाये, तो क्या गम है.
एक बार तैर गए ये दरिया,
अब डूब भी जाएँ, तो क्या गम है.
मौत तो आएगी, अगर जिंदगी है,
मौत ही अगर जिंदगी हो, तो क्या गम है.
परमीत सिंह धुरंधर