यकीन


मुझे पीने का शौक हैं,
तू पिलाने की शौक़ीन बन.
छोड़ ये वफ़ा, बेवफाई की बातें,
तू एक बार तो,
इन बादलों की जमीन बन.
मुझे बरस कर,
मिट जाने का डर नहीं।
तुझे भींग कर,
लहलहाने में भय है.
कब तक टकटकी लगाओगे,
खुदा के दर पे मदद की,
कभी तो अपने योवन का यकीन बन.

परमीत सिंह धुरंधर

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