झुमका ला दीं, हँसुली ला दीं,
तनी बोलअ ना रानी, हंस के.
रोटी बनैले बानी,
तहरे खातिर घी घस के.
दिल्ली घुमा दीं, बॉम्बे घुमा दीं,
तनी बैठअ ना रानी, सट के.
छोड़ के बथान, तहरे खातिर,
खटिया डल्ले बानी आज घर में.
पैर दबा दीं, हाथ दबा दीं,
तनी आवअ ना रानी, सज के.
मूड बनैले बानी तहरा खातिर,
आज रम से.
परमीत सिंह धुरंधर