नाजायज खुशियाँ


तेरी आँखों से शिकायत,
हर आँख कर रही है.
तेरी खुशियाँ, इतनी है नाजायज,
की हर माँ रो रही है.
कब तक रौंदेगा तू,
यों लाखो जिंदगी,
हर तरफ से अब एक ही,
ये आवाज आ रही है.
ढूंढता है जिसे तू यूँ,
दर-दर पे भटक के,
वो खुदा की नजर भी कोई,
अब रहनुमा ढूंढ रही है.

परमीत सिंह धुरंधर

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