आग बथान के


ललुआ भइल, भलुआ भइल,
पर बारु अभी भी कमाल के.
आव अ न रानी, खाल अ ना रानी,
मरई में, आज हमरा साथ में.
आँगना में त अ ओसा पड़ी,
आग ई ले जा, तू आज, बथान से.
पोता भइल, नाती भइल,
पर लागेलू अभी भी सोलह साल के.
आव अ न रानी, बैठ अ ना रानी,
कम्बल में पाँव डाल के.
आँगना में त अ ओसा पड़ी,
आग ई ले जा, तू आज, बथान से.

परमीत सिंह धुरंधर

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