प्यासा, प्यासा, प्यासा, प्यासा हूँ,
तेरी चाहत में एक तमाशा हूँ.
गैरत मेरी, तो कब की खो गयी,
अब तो बस, एक चाय का प्याला हूँ.
परमीत सिंह धुरंधर
प्यासा, प्यासा, प्यासा, प्यासा हूँ,
तेरी चाहत में एक तमाशा हूँ.
गैरत मेरी, तो कब की खो गयी,
अब तो बस, एक चाय का प्याला हूँ.
परमीत सिंह धुरंधर