प्रेम और वासना


स्त्री को प्रेम जवानी में और मर्द को बुढ़ापे में होता है. एक को हमने चरित्रहीनता तो दूसरे को वासना का नाम दे दिया है, जबकि प्रेम की और दूसरी अवस्था सिर्फ और सिर्फ दोनों की मज़बूरी है. उसे रोकने के लिए हम वफ़ा, इज्जत, और समाज की दुहाई देते हैं और हमें रोकने के लिए वो उम्र, परिवार,  और अपने बच्चों की दुहाई।

परमीत सिंह धुरंधर

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