मधुर नहीं है प्रेम कोई


मधुर नहीं है प्रेम कोई,
न मधुर ही है कोई ख़्वाब हाँ.
कहीं डूब रहा है सूरज रोज,
कहीं घट रहा है रूप चाँद का.
कहीं पुष्प को इंतज़ार है,
किसी भ्रमर के चुम्बन का.
कहीं भ्रमर भी है कैद में,
हो आसक्त इस पराग का.
जलने को अब क्या रखा है,
महबूब तेरी यादों के सिवा.
तेरे योवन पे टूटे दर्पण कई,
मेरे योवन को न मिला कोई तुझ सा.

परमीत सिंह धुरंधर

Love is not sweet…Crassa

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