मेरे साहस की सहचारिणी


तुम ह्रदय की स्वामिनी,
धमनियों की रागिनी,
नस – नस का मेरे स्पंदन हो,
तुम हो मेरे मन की कामिनी।
चक्षुओं की मेरी रौशनी,
मेरे अधरों पे प्रज्जवलित अग्नि,
मेरे साँसों की ऊष्मा हो,
तुम हो मेरे साहस की सहचारिणी।

परमीत सिंह धुरंधर

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