संगम


संगम हुई तो समझे सरस्वती का दर्द,
वो मेरी न हो सकी जब हम थे एक संग.
भूल तो सबसे हुई पर हम भूल न सके,
एक भूल की इतनी बड़ी कीमत.

परमीत सिंह धुरंधर

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