खूबसूरत बंगलों में मोहब्बत की गुंजाइस ही क्या,
शिकारी शिकार करे तो फिर बचने की गुंजाइस ही क्या।
लो जल के रख दिया है दीपक, तुम संवर के बैठो तो ज़रा,
घूँघट न सरक जाए खुद-बी-खुद तो मेरी मोहब्बत ही क्या।
मिल जाएंगे तुम्हारे हुस्न के दीवाने कई हर मोड़ पे,
जिसके सीने में तुम धड़कों, उसका हर मोड़ पे मिलना ही क्या।
परमीत सिंह धुरंधर