जख्मों का समंदर


तेरा मुस्कराना,
मुझे जख्मों का समंदर दे गया.
फासले तो आ ही गए हैं दरमियाँ,
मगर निगाहों का असर रह गया.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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