वो बड़ी मशहूर हैं,
मैं बड़ा मगरूर हूँ.
दोनों की जवानी ही ऐसी है,
की नजरें एक – दूसरे पे,
बस जिस्म-जिस्म दूर-दूर है.
जो हसतें हैं Crassa पे,
वो क्या जाने?
हम रातो को कितना मसरूफ हैं.
वो हो गई किसी की,
मगर उनकी पतली कमर पे,
ये दिल आज भी मजबूर है.
परमीत सिंह धुरंधर