अर्ज किया है दोस्तों,
की जवानी उनपे चढ़ी,
और बर्बाद हम हो गए.
लुटा हमें उसने जी भरकर,
और जमाने भरके,
गुनाहगार हम हो गए.
परमीत सिंह धुरंधर
अर्ज किया है दोस्तों,
की जवानी उनपे चढ़ी,
और बर्बाद हम हो गए.
लुटा हमें उसने जी भरकर,
और जमाने भरके,
गुनाहगार हम हो गए.
परमीत सिंह धुरंधर